psychology in hindi cover

Psychology in Hindi

हेलो दोस्तों , Psychology in Hindi के इस Educational आर्टिकल में आपका स्वागत हे।

क्या आप जानते हे के हमारे शरीर cells (कोशिकाए) हर मिनट बदलता हे ? लेकिन हमारे दिमाग के न्यूरॉन्स का जन्म हमारे जन्म के साथ ही होता हे और वही मरने तक हमारे साथ रहते हे। लेकिन आप सोच रहे होंगे के में इन सब की बाते क्यों कर रहा हूँ ? क्यूंकि ये न्यूरोन्स हमारे दिमाग में पाए हे और यही सब दिमाग में होने वाली रहस्यमय चीज़ो का सबूत हे।

हमारा दिमाग शरीर के बाकि सब अंगो से बहोत ही जटिल हे। और यही दिमाग के व्यवहारों से जुड़ा हुआ हे मनोविज्ञान (Psychology in Hindi ) . कभी-कभी लोग तर्क देते हैं कि मनोविज्ञान( Psychology ) रसायन विज्ञान या जीव विज्ञान या भौतिकी की तुलना में एक नरम विज्ञान(soft science) है, यह सच है । लेकिंग साइकोलॉजी का सांख्यिकीय महत्व व्यापक है, और आप जानना चाहते हैं कि क्यों?

ऐसा कोई समीकरण नहीं हैं जो इसे परिभाषित कर सकें। हम सब के पास दिमाग और संवेदना होने के बावजूत हमारी दुनिय को देखने की दृस्टि कई बार की गलत होती हे। और इसलिए हमारे पास मनोविज्ञान ( Psychology in Hindi ) का यह अद्भुत विज्ञान है।

मनोविज्ञान की मदद से आप अपना पर दुसरो क्व दिमाग के वर्तन को समझ सकते हे। अपने मन की समझ को गहरा कर सकते हे और अपने कार्यो में सुधार कर सकते हे। जो हम काम करते हे क्यों करते हे ? जो हम सोचते हे क्यों सोचते हे और मह्सूस करते हे ? इसका इतिहास , इसकी तकनीक सब समझेंगेसाइकोलॉजी इन हिंदी में।

What is psychology in hindi ?

क्या हे मनोविज्ञान ?

Psychology in Hindi
Psychology in Hindi

Psychology in Hindi सोलहवीं शताब्दी के मोड़ के आसपास तक ‘मनोविज्ञान’ शब्द गढ़ा नहीं गया था। , और जिस अभ्यास को हम वास्तव में आज विज्ञान कहेंगे, वह 1800 के दशक के मध्य तक स्थापित नहीं हुआ था। लेकिन निश्चित रूप से, मनुष्य हमेशा अपने बारे में और दिमाग में क्या हो रहा है उसके बारे में उत्सुक रहा है ।

वास्तव में, मनोविज्ञान प्रश्नों के संदर्भ में सबसे बेतहाशा विविध विज्ञानों में से एक है । यह प्रस्तावित करता है, इसके लागू होने के तरीके, और इसमें शामिल विचार और अनुशासन के विभिन्न तरीके।

psychology meaning in hindi : American Psychological Association के मुताबिक मनोविज्ञान की आज की औपचारिक परिभाषा, मनुष्य के व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन है । यह मन का अध्ययन है कि यह कैसे काम करता है और यह व्यवहार को कैसे प्रभावित करता है। मनोविज्ञान व्यवहार को देखने और रिकॉर्ड करने की आवश्यकता पहचानता है, चाहे वह चीखना, रोना या खेलना हो , लेकिन यह हमारी मानसिक प्रक्रियाओं की वजह से होता है: एक ऐसा मिश्रण जो इन सभी विभिन्न विचारधाराओं से आता है।

हम क्या सोचते हैं और महसूस करते हैं और विश्वास करते हैं। मनोविज्ञान एक एकीकृत विज्ञान है। एकीकृत मनोविज्ञान मानसिक उपचार के लिए एक समग्र दृष्टिकोण के साथ व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं के अध्ययन को जोड़ता है ।मनोविज्ञान के विषय का सार दिलचस्प प्रश्न पूछने के विभिन्न तरीकों को बनाने और सभी प्रकार के माहिती -एकत्रीकरण विधियों के माध्यम से उनका उत्तर देने का प्रयास करना हे।

Sociology कैसे अलग हे psychology in hindi से ?

मनोविज्ञान मानसिक प्रक्रियाओं और व्यवहार का अध्ययन है। मनोविज्ञान व्यक्ति को समझने की कोशिश करता है और व्यक्ति समूह से कैसे संबंधित है। इसके विपरीत, Sociology व्यवस्थाओं और समाज का अध्ययन है। यह गरीबी, खाद्य और बेरोजगारी जैसे बड़े-स्तर के मुद्दों की जांच करता है।

Sociology in Hindi के ऊपर मेने विस्तृत आर्टिकल लिखा हे तो आप उसे जरूर पढ़े।

types of psychology in hindi :

मनोविज्ञान के प्रकार :

  • Social psychology : समाज के व्यव्हार , विकास , सोच , रिवाज इत्यादि को समझने के लिए माओविग्यान की ये शाखा काम आती हे।
  • जैविक मनोविज्ञान : शरीर के जैविक बदलाव और जैविक प्रक्रियाओं का दिमाग पे असर जानने का काम इस शाखा में होता हे।
  • Developmental psychology : यह व्यवस्थित मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों का वैज्ञानिक अध्ययन है जो एक व्यक्ति अपने जीवन काल में अनुभव करता है, जिसे अक्सर मानव विकास कहा जाता है।
  • Forensic psychology : फोरेंसिक मनोविज्ञान में मनोविज्ञान को आपराधिक जांच और कानून में लागू करना है।
  • Occupational psychology : व्यावसायिक या संगठनात्मक मनोवैज्ञानिक काम पर और प्रशिक्षण में लोगों के प्रदर्शन के बारे में आकलन और सिफारिशें करने में शामिल होते हैं।
  • Clinical psychology : मनोविज्ञान की ये शाखा मानसिक बिमारिओ को समझने और उनका इलाज करने के लिए काम में आती हे।
  • Personality psychology : व्यक्तित्व मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की एक शाखा है जो व्यक्तियों के बीच व्यक्तित्व और उसकी भिन्नता का अध्ययन करती है। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि मनोवैज्ञानिक तरीके से लोग व्यक्तिगत रूप से कैसे भिन्न होते हैं।

Psychologists (मनोवैज्ञानिकों)और psychiatrist(मनोचिकित्सक) में क्या अंतर हे ?

एक मनोवैज्ञानिक एक प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर है जिसने पीएचडी पूरी की है। मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक के बीच यही अंतर है के एक मनोचिकित्सक दवा लिख ​​सकता है ।

psychologist
psychologist

जबकि एक मनोवैज्ञानिक के पास स्वास्थ्य लाभ के लिए क़ानूनी तोर दवा देने की सत्ता नहीं होती। मनोवैज्ञानिक थेरेपी के माध्यम से इलाज करता हे ।

Research and experimentation of psychology in Hindi :

मनोविज्ञान का रिसर्च और प्रयोग :

हम सबके पास अंर्तज्ञान(intuition)होता हे। जो हमें बताता हे के क्या होने वाला हे । जैसे आपने कई डिटेक्टिव टीवी सीरियल या मूवीज में देखा होगा। हम कुछ चीज़ के बारे में अंदाजा लगते हे और वो सच हो जाता हे। जैसे आपने किसी दोस्त को कहा की बर्गर खाने से वो बीमार पड़ जायेगा और ऐसा ही हुआ हो।

लेकिन यह महसूस करना महत्वपूर्ण है कि आपका अंतर्ज्ञान हमेशा सही नहीं होता है। वास्तव में, कभी-कभी यह बिल्कुल गलत होता है, और हम झूठे अंतर्ज्ञान के खतरों को बहुत कम आंकते हैं। यदि आपके पास किसी व्यक्ति और उसके व्यवहार के बारे में कोई विचार है जो सही साबित होता है, तो आपके अंतर्ज्ञान में आपके विश्वास को मजबूत करता है।

एक और कारण है कि आप अपने अंतर्ज्ञान पर आँख बंद करके भरोसा नहीं कर सकते हैं, जो हे आपका अति आत्मविश्वास। कभी-कभी, आप वास्तव में ऐसा महसूस करते हैं कि आप लोगों के बारे में सही हैं जबकि वास्तव में आप सच में गलत हैं। हम सबके साथ ये होता हे। इसलिए हमारे पास मनोवैज्ञानिक रिसर्च और प्रयोग के तरीके और सुरक्षा उपाय हैं, और वैज्ञानिक जांच की शानदार प्रक्रिया।

ज्यादातर मायनों में मनोवैज्ञानिक शोध किसी भी अन्य वैज्ञानिक विषय से अलग नहीं है। जैसे चरण एक हमेशा यह पता लगा रहा है कि अपने विषय के बारे में सामान्य प्रश्न कैसे पूछें और उन्हें मापने योग्य, परीक्षण योग्य प्रस्तावों में बदल दें । इसे आपके प्रश्नों का संचालन करना कहा जाता है।

यह एक प्रश्न और एक सिद्धांत से शुरू होता है, विज्ञान में एक सिद्धांत वह है जो बहुत सारे विभिन्न अवलोकनों को समझाता और व्यवस्थित करता है और भविस्य में होने वाले परिणाम बताता हे। और जब आप एक परीक्षण योग्य भविष्यवाणी के साथ आते हैं, तो यह आपकी परिकल्पना(hypotheses) है।

Research of Psychology in Hindi
Research of Psychology in Hindi

जैसे ही आपकी परिकल्पना और सिद्धांत तय हो जाते हे तब एक ऐसा परीक्षण तय किया जाता हे जिसे बार बार किया जा सके। क्यूंकि आप जानते हे रिसर्च में एक बार टेस्ट लेने से आपकी परिकल्पना सिद्ध नहीं हो जाती। इनको बार बार अलग अलग लोगो पर और अलग अलग परिस्थिति में टेस्ट किया जाता हे और आपकी परिकल्पना सही हे तो आप को हर बार एक ही तरह के परिणाम मिलेंगे जो आपने सोचे थे ।

मान लीजिए एक ऐसी परिकल्पना की जाये की फलसब्जी खाने से वजन कम होता हे । तो एक ही इंसान के ऊपर टेस्ट के बाद परिणामस्वरूप वजन उत्तरता हे तो परिकल्पना को सिद्ध नहीं माना जायेगा। बल्कि इसी टेस्ट को बार बार अलग लोगो पर किया जायेगा और सब टेस्ट में एक जैसे ही परिणाम परिकल्पना के अनुसार मिलते हे तभी परिकल्पना (hypotheses) को साबित किया जा सकता हे।

Psychology in hindi में कई तरह की रिसर्च की जाती हे :

1.Case studies :

Psychology in hindi में केस स्टडीज, जो एक व्यक्ति को गहराई से देखती हैं। व्यक्ति को प्रश्न पूछे जाते हे और उनके व्यव्हार के बारे में जानकारी इक्कठा की जाती हे। जिनसे पता चलता हे उन्हें क्या पसंद हे क्या नहीं उनकी सोच किस तरह की हे। केस स्टडी कभी-कभी भ्रामक भी हो सकती हैं, क्योंकि उन्हें दोहराया नहीं जा सकता है, फिर भी, वे हमें यह दिखाने में अच्छे हैं कि क्या हो सकता है और अधिक व्यापक और सामान्य अध्ययन के लिए प्रश्न तैयार करते हैं। जिसके हम जवाब ढूढ़ सकते हे।

केस स्टडी भी अक्सर यादगार और एक कहानी होती है जो व्यवहार का निरीक्षण और वर्णन करने के लिए मनोवैज्ञानिक के उपयोग में आती हैं। हो सकता हे किसी के केस स्टडी से पता चले के उस किरन नामके इंसान को कुतो से डर लगता हो पर जरूरी नहीं हे के सबको कुत्तो से डर लगता हो। हो सकता हे किरन के मामले में शायद उसके साथ कुत्तो से लेकर कोई ख़राब यादे जुडी हुई हो। लेकिन निर्णायक रूप से यह निर्धारित करने के लिए आपको अभी भी कई अन्य मामलों को देखना होगा।

2. Naturalistic observation :

Naturalistic observation में जहां शोधकर्ता बस एक प्राकृतिक वातावरण में मानव व्यवहार को देखते हे ,चाहे वह चिम्पांजी हो जो जंगल में चींटी के दर में झांक रहा हो या स्कूल में मस्ती करते बच्चे या नशे में धुत्त दोस्त या सॉकर खेलों में खिलाडी । तो हाँ, मूल रूप से सिर्फ लोगों की जासूसी करना। लेकिन बिना किसीको परेशान किये और परिस्थिति को बदले बिना।

 Naturalistic observation
Naturalistic-observation

केस स्टडी की तरह, Naturalistic observation व्यवहार का वर्णन करने में बहुत अच्छे हैं, लेकिन वे समझाने में बहुत सीमित हैं । उनकी राय और व्यवहार की रिपोर्ट करने के लिए, मनोवैज्ञानिक लोगों से पूछकर surveys या interview का उपयोग करके व्यवहार संबंधी डेटा भी एकत्र कर सकते हैं । अब हम psychology in Hindi में Surveys के बारे में जानेंगे।

3. Surveys:

Sexuality researcher अल्फ्रेड किन्से ने इस तकनीक का प्रसिद्ध रूप से इस्तेमाल किया जब उन्होंने हजारों पुरुषों और महिलाओं का Survey उनके यौन इतिहास पर किया और अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए । उस 2 किताब का नाम हे: 1.Sexual Behavior in the Human Male, 2.Sexual Behavior in the Human Female .

(Psychology in Hindi) Surveys सचेत रूप से धारित दृष्टिकोणों और विश्वासों तक पहुँचने का एक शानदार तरीका है, लेकिन प्रश्न कैसे पूछें यह मुश्किल हो सकता है; सूक्ष्म शब्द विकल्प परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए “प्रतिबंध” या “सेंसर” जैसे अधिक सशक्त शब्द “सीमा” या “अनुमति न दें” की तुलना में भिन्न प्रतिक्रियाएं प्राप्त कर सकते हैं।

एक ही तरह के सवालों को अलग अलग तरीके से पूछे जाने पर जवाब भी अलग अलग मिलते हे तो surveys करते वक्त इन सब चीज़ो का ध्यान रखना चाहिए । और ये भी महत्व रखता हे के आप किस इंसान से सवाल पूछ रहे हो।

तो एक बार जब आप Surveys , केस स्टडी या Naturalistic observation के साथ व्यवहार का वर्णन कर लेते हैं तब आप इसका अर्थ निकालना शुरू कर सकते हैं, और भविष्य के व्यवहार की भविष्यवाणी भी कर सकते हैं। ऐसा करने का एक तरीका यह है कि कैसे एक का विशेषता या व्यवहार दूसरे से संबंधित है, या वे कैसे मेल खाते हैं। जैसे के किसीने फलसब्जी खाके वजन काम किया हो, पर हो सकता हे उसने साथ में व्यायाम भी किया हो और उपवास भी रखा हो या दवाई भी ली हो जिससे उसका वजन कम हुआ हो । ऐसे केस के कई सारे पहलु हो सकते हे जिनको ध्यान में रखकर निष्कर्ष लिया जाता हे। अब हम psychology in Hindi में experiments की तरफ बढ़ेंगे।

Experimentation of psychology in Hindi:

Psychology in hindi में Experiments से शोधकर्ता को अलग-अलग ग्रुप की परिस्थिति में बदलाव करके उन बदलाव के विभिन्न प्रभावों को समझ कर मानव व्यवहारों की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती हे। इसका मतलब है कि उन्हें कम से कम दो समूहों की आवश्यकता है: प्रयोगात्मक समूह, जिसकी परिस्थिति में बदलाव किये जायेंगे , और नियंत्रण समूह,जिसकी परिस्थिति में बदलाव यही किये जायेंगे ।

कभी-कभी एक या दोनों समूहों को इस बारे में सूचित नहीं किया जाता है कि वास्तव में क्या परीक्षण किया जा रहा है । शोधकर्ता स्वयं नहीं जानते कि कौन सा समूह प्रयोगात्मक है और कौन सा नियंत्रण है, इसलिए वे अनजाने में भी अपने व्यवहार के माध्यम से परिणामों को प्रभावित नहीं करते हैं।

उदाहरन के लिए मान लीजिए के हमें ये जानना हे के चाय पिने से दिमाग तेज़ चलता हे या नहीं। सड़क पर बाहर जाओ, विभिन्न प्रकार के लोगों के एक समूह को बुलाओ और randomly उन्हें तीन अलग-अलग समूहों में बांटो। ऐसे में प्रयोगात्मक समूह 1 को चाय पिलाई जाएगी जिसमे चाय कम होगी। जब की दूसरे प्रयोगात्मक समूह को चाय पिलाई जाय जिसमे ज़्यादा चाय हो । और नियंत्रण समूह को चाय की जगह पे प्लॅसिबो दिया जाय।

 maze
maze

एक बार जब आप सभी को चाय दे दें, तो उन्हें भूलभुलैया(maze) के खेल में ढीला कर दें और दूसरे छोर पर स्टॉपवॉच के साथ प्रतीक्षा करें। केवल यह देखना बाकी है के तीन अलग-अलग समूहों से अपने परिणामों को मापने और उनकी तुलना करने के बाद निर्णायक परिणाम क्या थे। यदि ज्यादा चाय पिने वाले लोग कम चाय पिने वाले लोग और प्लेसीबो समूहों की तुलना में दोगुने तेजी से भूलभुलैया (maze) के खेल में जित प्राप्त करते हैं,

तब तब हमारी परिकल्पना सही थी और साबित हो जायेगा के चाय पिने से दिमाग तेज़ होता हे या नहीं ?

History of psychology in Hindi :

मनोविज्ञान का इतिहास :

Greek philosopher Aristotle ने मानव चेतना पर विचार किया और निर्णय लिया कि यह हृदय में है, सिर में नहीं जो कि बिल्कुल और पूरी तरह से गलत है।

दो हजार साल पहले, चीनी शासकों ने दुनिया की पहली मनोवैज्ञानिक परीक्षा आयोजित की, जिसमें सार्वजनिक अधिकारियों को व्यक्तित्व और बुद्धि परीक्षण लेने की आवश्यकता थी। और 800 के दशक के उत्तरार्ध में, फ़ारसी डॉक्टर मुहम्मद इब्न ज़कारिया अल-रेज़, जिन्हें रेज़ेज़ के नाम से भी जाना जाता है, मानसिक बीमारी का वर्णन करने वाले पहले लोगों में से एक थे, और यहां तक ​​कि रोगियों का इलाज भी उनके बगदाद अस्पताल में एक बहुत ही प्रारंभिक मनोरोगी के रूप में किया गया था।

उन शुरुआती विचारकों के प्रयासों से लेकर आज तक, मनोविज्ञान का क्षेत्र कुछ बड़े सवालों से निपटने के बारे में रहा है: मनुष्य कैसे नरसंहार करने और अन्य मनुष्यों को यातना देने जैसे भयानक काम कर सकते हैं, और हम कैसे जानते हैं कि वे चीजें भयानक हैं?

क्या हमारे पास स्वतंत्र इच्छा है, या हम केवल अपने पर्यावरण, जीव विज्ञान और अचेतन प्रभावों से प्रेरित हैं? मानसिक बीमारी क्या है, और हम इसके बारे में क्या कर सकते हैं? और चेतना क्या है? या स्वयं की धारणा? अगर मैं अपने बारे में जागरूकता खो देता हूं, तो क्या मैं अभी भी इंसान हूं?

(psychology in Hindi) मनोविज्ञान शब्द सुनते समय, ज्यादातर लोग शायद एक चिकित्सक के बारे में सोचते हैं जो एक सोफे पर लेटते समय रोगी के अपने दिन का विवरण सुनता है। हो सकता है कि चिकित्सक ने चश्मा पहना हो। यदि आप मनोविज्ञान के बारे में सोच रहे हैं, तो आप शायद फ्रायड को याद कर रहे हैं।

Sigmund freud
Sigmund freud

सिगमंड फ्रायड अपने समय के सबसे प्रभावशाली और विवादास्पद विचारकों में से एक थे, शायद सभी समय के। उनके सिद्धांतों ने बचपन, व्यक्तित्व, सपने और कामुकता पर हमारे विचारों को बनाने में मदद की। और उनके काम ने समर्थन और विरोध दोनों की विरासत को हवा दी।

उनका जीवन लंबा था और अमेरिकी CIVILWAR से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध तक के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। लेकिन अधिकांश महान वैज्ञानिकों की तरह, फ्रायड ने दूसरों के काम पर निर्माण करके अपने क्रांतिकारी विचारों को विकसित किया, और निश्चित रूप से, क्षेत्र में नवाचार उनके साथ नहीं रुका। उदाहरण के लिए, फ्रायड के समय के आसपास, मानव मन के अध्ययन से निपटने के तरीके के बारे में सोचने का बहुत अलग तरीका था।

वैज्ञानिक मनोविज्ञान की शुरुआत 1879 में जर्मनी में हुई जब चिकित्सक विल्हेम वुंड्ट ने लीपज़िग विश्वविद्यालय में पहली मनोविज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना की। फिजियोलॉजिकल साइकोलॉजी के अपने सिद्धांतों को प्रकाशित करने के कुछ ही वर्षों बाद, फिजियोलॉजिकल साइकोलॉजी को पहली सच्ची मनोविज्ञान पाठ्यपुस्तक माना जाता है।

वुंड्ट और उनके छात्र एडवर्ड ब्रैडफोर्ड टिचनर ​​ने रसायनज्ञों और भौतिकविदों से संकेत लिया और तर्क दिया कि यदि वे लोग सभी पदार्थों को सरल तत्वों या संरचनाओं में तोड़ सकते हैं, तो वे मस्तिष्क के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सके?

Edward bradford titchener
Edward bradford titchener

उन्होंने रोगियों को अंदर की ओर देखने के लिए चेतना की संरचनाओं को समझने की कोशिश की, उनसे पूछा कि जब उन्होंने सूर्यास्त देखा, या कॉफी की गंध सूंघी तो उन्हें कैसा लगा उन्हें केसा महसूस हुआ। टिचनर ​​ने इस दृष्टिकोण को ‘संरचनावाद’ नाम दिया, यह वास्तव में आत्मनिरीक्षण पर इतना अधिक निर्भर था कि यह बहुत अधिक व्यक्तिपरक हो गया। मेरा मतलब है, आप मेरी तुलना में कुछ अलग महसूस कर सकते हैं और नहीं भी ।

मनोवैज्ञानिक, निश्चित रूप से, वास्तव में एक रोगी के आंतरिक विचारों या भावनाओं का निरीक्षण नहीं कर सकते हैं, इसलिए अंततः, सोचने का संरचनावादी तरीका काफी अल्पकालिक था।

इसके विपरीत, अमेरिकी चिकित्सक और दार्शनिक विलियम जेम्स ने प्रश्नों का एक अलग सेट प्रस्तावित किया, इस पर ध्यान केंद्रित करते हुए कि हम क्यों सोचते हैं और महसूस करते हैं और गंध और चाटना, या जो कुछ भी करते हैं। मूल रूप से, उन्होंने व्यवहार के कार्य पर ध्यान केंद्रित किया।

William James
William James

जेम्स ने 1890 में अपनी मौलिक पुस्तक, द प्रिंसिपल्स ऑफ साइकोलॉजी प्रकाशित की, जिसमें मनोविज्ञान को मानसिक जीवन के विज्ञान के रूप में परिभाषित किया गया था। सिगमंड फ्रायड ने अपने चिकित्सा करियर की शुरुआत विनीज़ अस्पताल में की थी।

लेकिन 1886 में, उन्होंने तंत्रिका संबंधी विकारों में विशेषज्ञता के साथ अपना अभ्यास शुरू किया। इस समय के दौरान, फ्रायड ने अपने सहयोगी जोसेफ ब्रेउर को अन्ना ओ नामक एक मरीज का इलाज करते हुए एक नए टॉकिंग इलाज के साथ देखा। मूल रूप से, उसने उसे सिर्फ उसके लक्षणों के बारे में बात करने दिया। जितना अधिक उसने बात की और दर्दनाक यादें खींचीं, उतना ही उसके लक्षण कम होते गए। यह एक सफलता थी, और इसने फ्रायड को हमेशा के लिए बदल दिया।

तब से, फ्रायड ने अपने रोगियों को स्वतंत्र सहयोगी के लिए, जो कुछ भी मन में आया, उसके बारे में स्वतंत्र रूप से बात करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस तकनीक ने उनके करियर और मनोविज्ञान की एक पूरी शाखा के लिए आधार प्रदान किया।

1900 में उन्होंने अपनी पुस्तक द इंटरप्रिटेशन ऑफ़ ड्रीम्स प्रकाशित की, जहाँ उन्होंने मनोविश्लेषण के अपने सिद्धांत का परिचय दिया। अब, आप शायद मनोविश्लेषण को एक इलाज के रूप में सोचते हैं – पूरे रोगी को सोफे के परिदृश्य पर। और यह निश्चित रूप से इसका हिस्सा है। लेकिन फ्रायड की अवधारणा वास्तव में उससे कहीं अधिक जटिल थी, और यह क्रांतिकारी थी।

मूल रूप से फ्रायड ने सुझाव दिया कि हम सभी मानसिक प्रक्रियाओं से गहराई से प्रभावित हैं जिनके बारे में हमें पता भी नहीं है। अब यह हमें लगभग स्पष्ट लगता है, लेकिन फ्रायड के सिद्धांत की प्रतिभा का एक हिस्सा यह था कि 1900 में, यह बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं था। यह विचार कि हमारा दिमाग किसी ऐसी चीज से संचालित हो सकता है जिसके बारे में हमारा दिमाग खुद नहीं जानता था, को समझना मुश्किल था।

तो फ्रायड वास्तव में क्या कह रहा था कि मानसिक विकारों को टॉक थेरेपी और आत्म-खोज के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। और यह वास्तव में एक बड़ी सफलता थी। क्योंकि इससे पहले, मानसिक बीमारियों वाले लोगों को स्वास्थ्य देखभाल तक ही सीमित रखा जाता था और उन्हें काम करने के लिए कम श्रम दिया जाता था और सबसे खराब स्थिति में उन्हें बिस्तर के फ्रेम में बांध दिया जाता था।

द इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स के बाद, फ्रायड ने 20 से अधिक किताबें और अनगिनत कागजात हाथ में एक सिगार के साथ हर समय प्रकाशित किए। 1930 के दशक के अंत तक, नाजियों ने ऑस्ट्रिया पर कब्जा कर लिया था, और फ्रायड और उनका यहूदी परिवार बाल-बाल बचकर इंग्लैंड भाग गया था। सितंबर 1939 तक, उनके कैंसरयुक्त जबड़े में दर्द बहुत अधिक था और एक डॉक्टर मित्र ने मॉर्फिन इंजेक्शन के माध्यम से आत्महत्या में उनकी सहायता की। वह अड़तीस का था।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि Psychology in Hindi मनोविज्ञान पर फ्रायड का प्रभाव स्मारकीय था। जबकि मनोविज्ञान के युवा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी सिद्धांत या तो दूर हो गए या किसी और चीज में विकसित हो गए, मनोविश्लेषण आज भी एक महत्वपूर्ण अवधारणा और अभ्यास बना हुआ है। 20वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के दौरान जब व्यवहारवाद ने एक उच्च रूपरेखा प्राप्त की।

इवान पावलोव, जॉन बी. वाटसन, और बी. एफ. स्किनर यहां प्रमुख खिलाड़ी थे। उन्होंने अवलोकन योग्य व्यवहार के अध्ययन पर ध्यान केंद्रित किया। स्किनर ने चूहों और कबूतरों और बच्चों को बक्सों में रखा और उन्हें कुछ व्यवहार करने के लिए वातानुकूलित किया। ठीक उसी समय जब फ्रायड इंग्लैंड भाग गया, स्किनर ने अपने व्यवहार के जीवों को प्रकाशित किया।

उस समय की दूसरी प्रमुख शक्ति, निश्चित रूप से, फ्रायड का मनोविश्लेषण था, और इसके कई वंशज सामूहिक रूप से मनोगतिक सिद्धांतों के रूप में जाने जाते थे। ये अचेतनता को आकार देने में शुरुआती अनुभवों के महत्व पर केंद्रित थे और यह प्रक्रिया हमारे विचारों, भावनाओं, व्यवहारों और व्यक्तित्वों को कैसे प्रभावित करती है।

20वीं सदी के मध्य तक, (Psychology in Hindi) मनोविज्ञान की अन्य प्रमुख ताकतें भी पनपती रही ।

Facts of psychology in hindi

मनोविज्ञान के तथ्य : psychology facts in hindi

में यकीन के साथ कह सकता हूँ के इन psychology in hindi के facts के बारे में जानकर दंग रह जायेंगे।

  • क्या आप जानते हे जब लोग इक्कठा होकर ग्रुप में बात करते हे तो उनके किसी की बुराई या शिकायत करने की शक्यता 80% तक बढ़ जाती हे।
Gossip group
Gossip group
  • क्या आप जानते हे की आपको प्यार में पड़ने के लिए सिर्फ 4 मिनट काफी हे ?
  • क्या आप जानते इंसान के 90 % दुःख दूसरे इंसान के अच्छे जीवन को देखकर याद आते हे।
  • अगर कोई अपना आपसे निराश होकर भलाबुरा तभी बोलता हे जब उसको आपकी परवाह हो। जो आपकी गलती को नज़र अंदाज़ कर देते हे अक्सर उन्हें आपकी परवाह नहीं होती।
early morning
early morning
  • जो लोग सुबह को जल्दी उठजाते हे उनका दिन उत्साह के पूरा होता हे।
  • एक रिसर्च के मुआबिक लोग सच से ज्यादा अफवाओं में ज्यादा भरोषा करते हे।
  • अगर आपका दोस्त आपको ऐसा कहे के आप बदल गए हो तो आप बदले नहीं हो बस आपने उन चीजों को करना बंध कर दिया जो आपका दोस्त चाहता हे ।
  • एक रिसर्च के मुताबिक आपकी सबसे बड़ी ख़ुशी भी 9 दिन से ज्यादा नहीं टिक सकती उसके बाद सब नार्मल लगने लगता हे।
Lonely
LonelinessLoneliness
  • मनोविज्ञान के मुताबिक आप तब अकेले यही महसूस करते जब आप अकेले होते हे बल्कि तब जब आप लोगो के साथ होकर भी आपकी कोई परवाह न करे।
  • आपका आत्मविश्वास आपको कई गुना आकर्षित बना देता हे सबके सामने भले ही आपको उस काम को करना न आता हो।
  • लोगो का उन लोगो के तरफ ज्यादा ध्यान जाता हे जो उनकोनज़र अंदाज़ कर देते हे।

तो ये थे psychology in Hindi के कुछ facts . ये तथ्य ज्यादातर परिस्थितिओ में सही होते हुए नज़र आएंगे और कुछ परिस्थिति में यही भी क्यूंकि आप जानते हे मनोविज्ञान (psychology in Hindi) एक जटिल विषय हे। उतना ही जटिल जितना हमारा दिमाग और ये ब्रह्मांड हे।

आशा करता हु आपको मनोविज्ञान (psychology in Hindi) आर्टिकल पसंद आया होगा । मेरे हर एक एजुकेशनल आर्टिकल में ,में पूरी जानकारी देने की कोशिश करता हूँ । जरूर से आपको psychology in Hindi मे से काफी जानकारी मिली होगी। कमेंट बॉक्स में अभिप्राय और सुझाव जरूर दे और कोई समस्या हो तो ईमेल करे। धन्यवाद्

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