NLP
NLP kya hai
NLP kya hai

हेलो फ्रेंड्स , क्या आप जानना चाहते हे की NLP kya hai? और कैसे NLP आपके मन और जीवन को प्रभावशाली बना सकता हे ? तो बने रहिये आज के ब्लॉगपोस्ट में ।

आज का ब्लॉगपोस्ट काफी खास होने वाला हे क्यूंकि हम आज NLP की सभी चीजों के बारे में बात करेंगे । NLP kya hai? और कैसे काम करता हे और कैसे इसे अपने जीवन में इसे इस्तेमाल करे? सभी एनएलपी की तकनीक के बारे में शुरू से अंत तक सभी चीजों के बारे में बात करेंगे तो दोस्तों अंत तक जरूर पढ़ना । ठीक हे ? चलिए सबसे पहले जानते हे NLP kya hai?

NLP kya hai? और NLP का क्या अर्थ होता हे ? what is nlp in Hindi

NLP stands for Neuro linguistic programming या NLP Full form न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग होता हे । जिसको हिंदी में (NLP in hindi) न्यूरो भाषाई प्रोग्रामिंग कह सकते हे । nlp kya hai in hindi

एनएलपी क्या हे ये एक ऐसी मनोवैज्ञानिक तकनीक हे जिससे आप अपने दिमाग की तालीम के जरिए अपने जीवन में इच्छित परिणाम ला सकते हे । एक एक करके इन सब्दो को समझते हे और जानते हे की आखिर? nlp kya hota hai

Neuro Linguistic Programming

हमारे जीवन में हम जो कुछ भी अनुभव करते हे वो हमारी इन्द्रियों के जरिए होता हे । हमारी पांच इंद्रियां हे स्पर्श, दृष्टि, श्रवण, गंध और स्वाद (स्पर्श करना, देखना, सुनना, सूंघना, स्वाद लेना) । इन इन्द्रियों के जरिए हम दुनिया की हकीकत का अनुभव करते हे । (blogtopic : NLP kya hai)

लेकिन हमारा दिमाग उन महसूस होने वाली चीजों को समझ कर हमारे दिमाग में हकीकत का नक्शा बना लेता हे (जो दुनिया की हकीकत से बिलकुल अलग भी हो सकता हे) । जिसके आधार पर हम जीवन के कई सारे फैसले लेते हे ।

ये वही हकीकत का नक्शा या चित्र होते हे जो दिमाग में फीड हुए होते हे और आपको आपका घर का रास्ता याद दिलाते हे, समस्याओ का हल दिखाते हे , खतरे पर आगाह करते और बचाते हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

लेकिन आपके बचपन में हुए बुरे अनुभव, बुरे हालत और नकारात्मक भावनाए और ख़यालात भी इसी हकीकत के नक़्शे का हिस्सा हे । और ये नकारात्मक ख़यालात ही आपको गलत दिशा में ले जाता हे, आपके आत्मविस्वास को डगमगाता हे और यह आपको जीवन में महान चीजें करने से रोकता है। इस हकीकत का नक़्शा आपकी इन्द्रियों के अनुभव पर आधार रखता हे ।

लेकिन आप केवल वही अनुभव करते हैं जो आपकी इंद्रियां आपको अनुभव करने की अनुमति देती हैं । इसलिए न्यूरो(Neuro) में हमारी इन्द्रियों की आसपास की चीजों को समझने की सीमा को बढ़ाने की बात की जाती हे । जिससे आप इन्द्रियों के माध्यम से आसपास हो रही चीजों को बेहतर समझ सके ।(blogtopic : NLP kya hai)

जैसे एक अंधे इंसान की सुनने की क्षमता बाकि लोगो से काफी अच्छी होती हे । उसी तरह आप की इन्द्रियों की क्षमता जितनी ज्यादा होगी उतना आप दुनिया की जानकारी काफी गहराई से ले पाएंगे ।

सरल अर्थ में न्यूरो यानि हमारे दिमाग के 86 अरब न्यूरोन्स यानि की दिमाग की कोशिकाए जिसका इस्तेमाल हम जानकारी को स्टोर करने ,सोचने और पुरे शरीर का नियंत्रण करने के लिए करते हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

Neurons
Neurons

(ज्यादा जानकारी के लिए दिमाग क्या होता हे और इसकी संरचना केसी हे ? ब्लॉगपोस्ट जरूर पढ़े ।)

दूसरा शब्द हे Linguistic (लिंग्विस्टिक) यानि की भाषा । जैसे ही हम इन्द्रियों के माध्यम से अनुभव करते हे उसे हम दिमाग में भाषा के रूप में अर्थ या मतलब दे देते हे । हम उसके माध्यम से संवाद करते हैं ।(blogtopic : NLP kya hai)

NLP में दो तरह के संवाद बताये गए हे जो हमारे दिमाग के सोचने और व्यव्हार करने के तरीको पर असर डालते हे । एक आंतरिक संवाद (Communication with the mind) और दूसरा बाहरी संवाद (Communication with the world)

एक बातचीत जो हम हमेशा अपने मन में करते हे और दूसरा जो हम बाहरी दुनिया में लोगो से करते हे । तो सरल भाषा में NLP में Linguistic शब्द ये बताता हे की हम इस भाषा का उपयोग कैसे करते हैं और यह हमें कैसे प्रभावित करता है ?

Programming यानि की दिमाग को ऐसे निर्देश देना या विचारो को अनुक्रम देना जिससे हमारी गतिविधि और व्यव्हार से हम हमारा इच्छित लक्ष्य प्राप्त करें ।(blogtopic : NLP kya hai)

जैसे कोई कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इसमें फीड किये गए निर्देश के आधार पर काम करता हे, उसी तरह हमारा दिमाग भी हमारे इसमें फीड की गयी भावनाए , जानकारी और चित्र की हुई गई प्रोग्रामिंग के मुताबिक प्रतिक्रिया देता हे । इस दिमाग को भी हम मन चाहा काम करवाने के लिए Program कर सकते हे । Nlp में जिसे ट्रैन किया जाता हे ।

अगर सरल भाषा में जानना हो की आपके लिए nlp क्या है तो ये जानले की ये एक तरह से ऐसी तकनीक या व्यायाम है जो आपके जीवन में आत्म-विकास और परिवर्तन लाता है । जिससे आप खुद पर काम कर सकें और वह व्यक्ति बन सकें जो आप बनना चाहते हैं और अपने जीवन में वांछित परिणाम प्राप्त कर सकते हैं ।(blogtopic : NLP kya hai)

न्यूरो भाषाई प्रोग्रामिंग क्या है और यह कैसे काम करता है?

एनएलपी प्रतिभा और गुणवत्ता का अध्ययन करता है । कैसे उत्कृष्ट व्यक्तियों और संगठनों को उनके उत्कृष्ट परिणाम मिलते हैं? उन विधियों को दूसरों को सिखाया जा सकता है ताकि वे भी उसी श्रेणी के परिणाम प्राप्त कर सकें। इस प्रक्रिया को मॉडलिंग कहा जाता है ।

इसलिए एनएलपी दुनिया में ईच्छित परिणाम प्राप्त करने के लिए पैटर्न का पता लगाने और उपयोग करने के लिए एक सीखने की तकनिक है । NLP की तकनीक सफल लोगो के चाल-चलन और उससे मिलने वाले परिणाम पर आधार रखती हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

एनएलपी न्यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं (हम कैसे सोचते हैं), भाषाविज्ञान (हमारा दिमाग भाषा का उपयोग कैसे करता है) और प्रोग्रामिंग (अनुभव के माध्यम से सीखा व्यवहार पैटर्न) से बना है।

NLP इतना बड़ा विषय हे की इसमें कई मनोवैज्ञानिक पद्धतिओ और परिभाषाओ को शामिल किया जा सकता हे । इसे एक ही ब्लॉगपोस्ट में समझाना मुश्किल हे । इसलिए आज हम NLP की कुछ मूल सिद्धांत और पद्धतिओ के बारे में जानेंगे ।

NLP की शुरुआत कैसे हुई ?

दोस्तों NLP की शुरुआत 1970 के दशक में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया शांता क्रूज़ में प्रोफेसर जॉन ग्राइंडर और अंडरग्रेजुएट रिचर्ड बंडलर के साथ मिलने से हुई । ये दोनों ही लोगो को मानवीय श्रेठता और इसके पीछे के कारण जानने में काफी दिलचस्पी थी ।(blogtopic : NLP kya hai)

John grinder and Richard bandler
John grinder and Richard bandler

उन्हें ये जानने में दिलचस्पी थी की क्यों कुछ लोग जीवन में श्रेष्ठ कार्य करते हे और मनचाहा परिणाम पाते हे ? जब की कुछ लोग इन चीजों को करने में नाकामयाब होते हे । इसी दिलचस्पी ने उनको प्रतिभाशाली व्यक्ति के व्यव्हार के पैटर्न का पालन करने का मार्ग दिखाया ।(blogtopic : NLP kya hai)

NLP में किसी प्रतिभाशाली (जो किसी भी कार्य में श्रेष्ठ हे) व्यक्ति की भाषा संरचना और व्यवहार पैटर्न को निकालने और दोहराने की प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण हे । जिसे मॉडलिंग कहा जाता हे । शुरुआत में ग्राइंडर और बैंडलर ने तीन लोगों को मॉडलिंग करके अपनी एनएलपी खोज शुरू की, । (blogtopic : NLP kya hai)

श्रेष्ठता की मॉडलिंग किसी के कौशल या उनके व्यक्तित्व की नकल करने की क्षमता है। किसी सफल व्यक्ति को मॉडल(नक़ल) करते समय उस व्यक्ति की कई सकारात्मक चीजों का अवलोकन किया जाता हे जैसे की उनके उठने बैठने का तरीका , उनकी सोच , खुद के साथ मन में चल रही उनकी बाते और विज़ुअलाइज़ेशन (मानसिक दृश्यावलोकन )।

ग्राइंडर और बैंडलर ने प्रत्यक्ष रूप से जानकारी प्राप्त नहीं की बल्कि इन 3 जीनियस को चुपचाप शांती से उनके व्यवहार और कार्य का अवलोकन करते गए । २ साल तक जीनियस व्यक्ति के व्यव्हार के पैटर्न का अवलोकन करने के बाद दोनों ने प्रतिभाओं के कौशल को स्पष्ट किया और एनएलपी का जन्म हुआ।(blogtopic : NLP kya hai)

एनएलपी पर ग्राइंडर और बैंडलर की पहली पुस्तक, स्ट्रक्चर ऑफ मैजिक: ए बुक अबाउट लैंग्वेज ऑफ थेरेपी, 1975 में प्रकाशित की गई थी । ये पुस्तक उन तीन प्रतिभाशाली व्यक्तिओ के आधार पर लिखी गई थी । इस प्रकाशन में, उन्होंने बातचीत के कुछ पैटर्न को उजागर करने का प्रयास किया, जो दूसरों लोगो से अलग माना जाता है ।

ये पुस्तक अन्य प्रसिद्ध मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों और शोधकर्ताओं से तकनीकों और सिद्धांतों को भी एकीकृत करता है ।

1970 के दशक में एनएलपी की चर्चा होने लगी । बैंडलर और ग्राइंडर NLP को दुसरो से सीखने के साधन की तरह बढ़ावा देने लगे जो लोगों को सीखा सकता हे की सफल लोग कैसे सफलता प्राप्त करते हैं । ताकि वे भी इसे दोहराकर मनचाहा परिणाम पा सकें ।(blogtopic : NLP kya hai)

एनएलपी के स्तंभ और पूर्वधारणाए (General Principles of Neurolinguistic programming)

एनएलपी के 6 बुनियादी सिद्धांत हैं जिन्हें एनएलपी के स्तंभ के रूप में जाना जाता है । आइये जानते हे इनके बारे में ।(blogtopic : NLP kya hai)

1. आप : You

एनएलपी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आप खुद हैं। आपकी भावनात्मक स्थिति, और आपके कौशल का स्तर । किसी भी उपकरण या जानकारी का उपयोग कुछ सुंदर या ख़राब दोनों बनाने के लिए किया जा सकता है। एनएलपी का उपयोग कैसे किया जाता है यह पूरी तरह आप पर निर्भर है ।(blogtopic : NLP kya hai)

आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप एनएलपी में कितने कुशल हैं। एनएलपी में आप सबसे सफल तब बनते हैं जब आपके कार्य और आपके शब्द आपके विश्वासों और मूल्यों को परिभाषित करते हैं ।

2.सामान्य सिद्धांत या पूर्वधारणाए : General principle and presuppositions of NLP

NLP में कई अवधारणाएँ और विचारो को अपनाया जाता हे । जिन्हे NLP में सामान्य सिद्धांत या पूर्वधारणा के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता हे । लेकिन ये सामान्य सिद्धांत या पूर्वधारणा वैज्ञानिक या गणितीय सिद्धांत की तरह नहीं हे लेकिन दिशा निर्देशों की तरह हे । ये आपको NLP की शिक्षा में दार्शनिक आधार प्रदान करते हैं ।

General principle and presuppositions
General principle and presuppositions

ये सिद्धांत या पूर्वधारणाएं एनएलपी के शुरुआती दिनों से ही मौजूद हैं और एनएलपी का सर्वोत्तम उपयोग करने के तरीके के बारे में एक मार्गदर्शक हैं । चलिए देखते हे । (blogtopic : NLP kya hai)

  • दूसरों के साथ बातचीत करते समय, इस बात की ज़िम्मेदारी लें कि दूसरे लोग आपके प्रति कैसी प्रतिक्रिया दिखाते हैं। (‘आपके बातचीत का अर्थ आपको मिलने वाली प्रतिक्रिया है) यानि की आपको अपनी बात दुसरो से करते वक्त उनके बुरे व्यव्हार की जिन्मेदारी भी खुद ही लेनी होगी । तो ही आप सिख पाएंगे की आप बातचीत की कला में कैसे बदलाव ला सकते हे ?(blogtopic : NLP kya hai)
  • दूसरों के साथ बातचीत करते हुए, ऐसा व्यवहार करें जैसे लोगों के पास वे सभी मानसिक और भावनात्मक संसाधन हैं जिनकी उन्हें आवश्यकता है, भले ही वे वर्तमान में इसे नहीं पहचानते हों ।(blogtopic : NLP kya hai)
  • लोगों से बात करते समय, उन्हें प्रभावित करने से पहले दूसरे व्यक्ति की धारणाओं की खोज करें। (‘दुनिया की अपनी धारणा में लोगों से मिलें’) जैसे छोटे बच्चो को प्रभावित करने के लिए उनके सामने बच्चा बनना जरुरी हे ।
  • दुनिया में लोगों के साथ बातचीत करते समय, पहचानें कि किसी भी स्थिति में कोई भी व्यक्ति उन साधनो के साथ सबसे अच्छा विकल्प चुन रहा है जो वे वर्तमान में उनके लिए उपलब्ध होता हैं।(blogtopic : NLP kya hai)
  • लोगो से बात करते वक्त ये जरूर समझे कि प्रत्येक व्यक्ति का ‘सत्य’ उनके लिए सत्य है, भले ही वह आपके ‘सत्य’ से भिन्न हो – क्योंकि वास्तव में किसी भी व्यक्ति का आंतरिक दृष्टिकोण ही उनके लिए दुनिया की हकीकत हे (चाहे दुनिया की हकीकत कितनी भी अलग हो )।(blogtopic : NLP kya hai)
  • ये पहचानें कि लोग शुद्ध, संवेदी-आधारित इनपुट (इन्द्रियों से मिल रही जानकारी ) की वास्तविकता के बजाय अपने आंतरिक द्रस्टिकोण की वास्तविकता के साथ बातचीत करते हैं । जिसको वजह से हमारे आखो से देखि हुई चीजों पर भी हमें कभी कभी यकीन नहीं होता । क्यूंकि हमारी आँखों से ज्यादा हमारे ख़यालात पर हमें यकीन होता हे । Source
  • व्यक्तिगत विकास और अच्छी मानसिक स्थिति के लिए, अपने व्यवहार और व्यवहार संबंधी नम्यता को बढ़ाएं। किसी भी बातचीत में, सबसे बड़े व्यवहारिक नम्यता वाले व्यक्ति का परिणाम पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है ।
  • किसी भी गलती या भूल को उससे मिलनेवाली सिख के रूप में परिभाषित करे । और अगर आप जो कर रहे हैं वह काम नहीं कर रहा है तो आप और रस्ते अपना सकते हे ।
  • ऐसे ही कार्य करे जैसे प्रत्येक व्यवहार किसी व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी स्तर पर सकारात्मक इरादे को पूरा करने के लिए किया गया है ।(blogtopic : NLP kya hai)
  • हर वक्त ऐसे व्यवहार करें जैसे कि हर समस्या का समाधान हो ।(blogtopic : NLP kya hai)
  • दूसरे व्यक्ति की पहचान या स्वयं छवि को पहचानने के लिए उनके व्यवहार और उनकी पहचान या स्वयं छवि के बीच अंतर को समझे ।(blogtopic : NLP kya hai)
  • NLP के सिद्धांत कारणों का विश्लेषण करने के बजाय समाधान खोजने पर जोर देता है – और एनएलपी में हम हमेशा विकल्प दूर करने के बजाय नये विकल्प जोड़े जाते हैं ।
  • एनएलपी एक सिद्धांत के बजाय एक मॉडल है – और यह व्यक्तिपरक अनुभव का अध्ययन है।
  • एनएलपी का कहना है कि मन और शरीर एक प्रणाली का हिस्सा हैं और सभी मानव व्यवहार की एक संरचना होती है ।
  • एनएलपी का मानना ​​है कि बाहरी व्यवहार इस बात का परिणाम है कि कोई व्यक्ति अपनी प्रतिनिधित्व प्रणाली का उपयोग कैसे करता है। (प्रतिनिधि प्रणाली को संवेदी(इन्द्रिय) तौर-तरीकों के रूप में भी जाना जाता है)
  • अगर एक इंसान कुछ कर सकता है तो शायद कोई भी कर सकता है।
  • चेतन मन की क्षमता बहुत सीमित है – माना जाता है कि यह एक साथ लगभग 4-5 चीजें, सूचनाओं के टुकड़े को ही याद रख पाता हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

NLP सिद्धांत पूरी तरह सत्य ना होते हुए भी NLP की स्टडी में काफी उपयोगी हे । यह मार्गदर्शक सिद्धांत है । वे आदर्शवादी या अवास्तविक होने के बजाय व्यावहारिक हैं और अन्य लोगों के साथ एनएलपी का सर्वोत्तम उपयोग कैसे करें, इस पर श्रेष्ठ दिशानिर्देश प्रदान करते हैं ।(blogtopic : NLP kya hai)

3. तालमेल (Rapport) – रिश्ते की गुणवत्ता

Rapport
Rapport – Quality of relationship

किसी भी रिश्ते का सबसे महत्वपूर्ण गुण हे विश्वास जिसको दो लोगो के बिच के तालमेल से ही बनता हे । इसलिए किसी भी रिश्ते में तालमेल होना जरुरी हे । एक दूसरे के अनुरूप होना बहुत जरुरी हे । रिश्ते में तालमेल होने के परिणामस्वरूप पारस्परिक विश्वास और प्रतिक्रिया होती है ।(blogtopic : NLP kya hai)

जिस तरह से दूसरा इंसान दुनिया को देखता हे उसे समझकर और सम्मान करने से आप रिश्तों में तालमेल हासिल कर सकते हो । अगर आपके और दूसरे इंसान के बिच में अगर तालमेल हे तो दूसरा व्यक्ति अभिस्वीकृत और अपनापन महसूस करेगा जिससे वो आपके तरफ प्रतिक्रियाशील रहेगा ।(blogtopic : NLP kya hai)

तालमेल यानि की संबंध , जिसके अनेक स्तर होते हे और कोई भी स्तर में दूर व्यक्ति का सम्मान करना और ध्यान देना काफी महत्वपूर्ण हे । तालमेल समय के साथ विश्वास में विकसित होता है । आप अपने पार्टनर को नए नजरिए से देखते हो ।

4. परिणाम(Outcome) – आप जो चाहते हैं उसके बारे में स्पष्ट रहें :

एनएलपी का मूल कौशल यह जानना है कि आप क्या चाहते हैं और दूसरों से यह जानने में सक्षम होना कि वे क्या चाहते हैं। एनएलपी हमेशा हर स्थिति के परिणामों के बारे में सोचने पर आधारित है । परिणाम वही है जो आप चाहते हैं और कार्य वह है जो आप इसे प्राप्त करने के लिए करते हैं ।(blogtopic : NLP kya hai)

Outcome
Outcome

उसके लिए आपको 3 बातें याद रखनी होंगी (blogtopic : NLP kya hai)

  • आपकी वर्तमान स्थिति क्या है? आप अभी क्या हो ?
  • आपकी वांछित स्थिति क्या है? क्या बनना चाहते हो ?
  • फिर वर्तमान स्थिति से वांछित स्थिति प्राप्त करने के लिए अपनी रणनीति की योजना बनाएं । आप जो बनना चाहते हो वो आप कैसे बनोगे ? उसके लिए आपको क्या करना होगा ? आदि

5. प्रतिक्रिया (Feedback) :

अपना परिणाम या लक्ष्य जो भी आपने तय किया हो , अगला कदम हे ये जानना की आप जो चाहते हे उसकी योजना के मुताबिक काम करने से आपको परिणाम वो मिल रहा हे ? अगर परिणाम वो नहीं हे जो आप चाहते थे तो केसा परिणाम मिल रहा हे आपको ?(blogtopic : NLP kya hai)

Feedback
Feedback

जिससे आपको पता चलेगा की आपको आगे क्या करना होगा ? परिणाम ना मिलने पर जो भी प्रतिक्रिया आप दे रहे हे वो सटीक और उचित हे या नहीं ? आप प्रतिक्रिया कैसे दे रहे हे अपनी इन्द्रियों के जरिए जैसे छू के , देख कर , सुन कर , सुंख कर या चखकर । क्या सिर्फ अपनी इन्द्रियों के जरिये ही फीडबैक दे सकते हे या और कोई तरीका हे ?

आपकी इन्द्रियों के जरिए मिलने वाली जानकारी आपको बता रही हे की आप अपने लक्ष्य के सही रास्ते पर हे या नहीं ?

6. (Flexibility) लचीलापन :

जब आप जानते हे की आपको क्या चाहिए और आपको क्या मिल रहा हे तब नयी तरकीबे आज़मानी चाहिए ।

अगर अभीतक आपने जो भी योजना और तरकीबे आज़माई हे अगर उससे परिणाम नहीं मिल रहा तो अलग-अलग रणनीति अपनाए । जितनी ज्यादा रणनीति उतना ही सफल होने की ज्यादा संभावना । NLP में विकल्पों को हमेशा बढ़ाया ही जाता हे । जितने भावनात्मक स्थिति, संचार शैली, दृश्टिकोण के विकल्प ज्यादा उतने ही बेहतर परिणाम ।

एनएलपी तालमेल और जागरूकता के संबंध में उद्देश्य से शासित विकल्पों को प्रोत्साहित करता है।

NLP की कुछ मुख्य तकनीक : Neuro linguistic Programming techniques

एनएलपी अपनी तकनीकों की श्रेणी के लिए प्रसिद्ध है। आप जो कुछ भी करते हैं उसे बदलने और सुधारने की तकनीकें NLP में हे । हम उनमे से सबसे उपयोगी और मुख्य तकनीको के बारे में जानेंगे ।(blogtopic : NLP kya hai)

1. Anchoring (एंकरिंग)

न्यूरो-भाषाई प्रोग्रामिंग में एंकरिंग उस प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जिसके द्वारा आप कोई एक इशारा (ज्यादातर हाथ का इशारा ), स्पर्श या ध्वनि को किसी अवस्था के चरम के साथ स्वयं या किसी और व्यक्ति में जोड़ देते हो । और उसी अवस्था को फिर से इस इशारे , स्पर्श या ध्वनि लगाकर वापस बुलाया या फिर से सक्रिय किया जा सकता है ।

एंकरिंग की प्रक्रिया में वांछित प्रतिक्रियाएं जैसे मेमोरी रिकॉल , मानसिक स्थिति में परिवर्तन और अन्यप्रतिक्रियाए शरीर में उत्तेजनाओं से जुडी हुई होती हे जिनको किसी इशारे , ध्वनि या स्पर्श जैसी हरकतों के द्वारा उत्पन्न किया जा सकता हे । एंकर की प्रतिक्रिया सकारात्मक या नकारात्मक दोनो हो सकती हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

हम जाने अनजाने में एंकरिंग का उपयोग करते रहे हे । उदाहरण के लिए अगर आप मायूस हो और आपका सबसे प्यारा दोस्त या गर्लफ्रेंड आपको नाम से बुलाये तब नाम सुनते ही आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती हे और मानसिक परिस्थिति में परिवर्तन होता हे । क्यूंकि ये उत्तेजना किसी के ध्वनि के सुनने पर उत्पन्न होती हे जो आपके मानसिक परिस्थिति में बदलाव लाती हे ।

वे बार-बार होने वाली उत्तेजनाओं से बनने और मजबूत होने में सक्षम हैं, जैसे की क्लासिक कंडीशनिंग की तरह । क्लासिक कंडीशनिंग में दो उत्तेजनाओं को जोड़ा जाता हे जिसमे किसी एक प्रतिक्रिया जो पहली बार दूसरी उत्तेजना से प्राप्त होती है । जिसके बार बार करने पर वही प्रतिक्रिया केवल पहली उत्तेजना द्वारा प्राप्त की जाती है ।(blogtopic : NLP kya hai)

मान लीजिए कि जब आपने अपने पसंदीदा खाने को सुंघा , तो आपको घंटी की आवाज भी सुनाई दी। जबकि घंटी का पसंदीदा खाने की गंध से कोई संबंध नहीं है, अगर घंटी की आवाज को गंध के साथ कई बार जोड़ा जाता है, तो घंटी की आवाज अंततः पसंदीदा खाने की इच्छा को ट्रिगर करेगी ।(blogtopic : NLP kya hai)

एंकरिंग का उपयोग कैसे करें?

  1. निर्धारित करें कि आप कैसा महसूस करना चाहते हैं । उदाहरण के तोर पर खुश या ताकतवर या जो भी आप महसूस करना चाहते हो ।(blogtopic : NLP kya hai)
  2. इसके बाद आंखे बंध कर उस समय को याद करें जब आपने वास्तव में ताकतवर या ख़ुशी को महसूस किया था ।
  3. एक एंकर चुनें जिसमें स्पर्श शामिल हो जैसे उदाहरण के लिए, अपने अंगूठे और तर्जनी को एक साथ छूना या मुठ्ठी बनाना या चुटकी बजाना आदि ।(blogtopic : NLP kya hai)
  4. याद रखें कि आपने अपनी स्मृति में क्या देखा, सुना और महसूस किया । (आशा करता हु अपनी स्मृति में आपने खुदको ताकतवर या खुश तो महसूस किया ही होगा ) खुदको को स्मृति के अंदर रखना चाहिए जैसे कि इसे फिर से जी रहे हों । स्मृति को दूर से न देखें; भावनाएँ वापस नहीं आएंगी । स्मृति को तब तक जीवित रखें जब तक कि आप अपने ऊपर आने वाले ताकत या ख़ुशी को उसी तरह महसूस करे जैसे उस समय पे किया था ।

उदाहरण के लिए, ख़ुशी या ताकत की भावना बढ़ने पर मुठ्ठी बनाए या अंगूठे और तर्जनी को एक साथ दबाए । जब भावना कम होने लगे तो अपने अंगूठे और तर्जनी को या मुठ्ठी छोड़ दें । यदि आपने इसे अच्छी तरह से किया है और कोई मन में संदेह नहीं हे की आपको ताकतवर महसूस नहीं करना चाहिए तो यह एंकर सेट हो चूका है ।(blogtopic : NLP kya hai)

  • इस एंकर का 5 से 6 बार अभ्यास करे । फिर बाद में इसका परिक्षण करे । उदाहरण के लिए, अपने अंगूठे और तर्जनी को एक साथ ठीक उसी तरह फिर से छूकर और पता करें कि क्या आप स्वाभाविक रूप से उस ख़ुशी की अवस्था तक पहुँचते हैं या नहीं । बेशक, संदेह न करें और एंकर का विरोध न करें । इसे होने दें । ऐसी तकनीक में अभ्यास करना बहुत जरुरी हे लेकिन ये काम जरूर करता हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

अब आप जब भी मुठ्ठी बनाएँगे या अंगूठे और तर्जनी को दबाएंगे आप ताकतवर महसूस करेंगे । हे ना बढ़िया बात ?

2. Future pacing (फ्यूचर पेसिंग)

एनएलपी में फ्यूचर पेसिंग का मतलब आमतौर पर किसी के कल्पित भविष्य में बदलाव लाना होता है। यह हमारे भविष्य की ‘टाइमलाइन’ को ‘रीमैपिंग’ करने और/या किसी बदलाव को ‘इंस्टॉल’ करने के तरीके के रूप में किया जाता है।

फ्यूचर पेसिंग एक प्रकार की मानसिक कल्पना है, क्या आपने कभी इतना ज्वलंत सपना देखा है कि जब आप जागते हैं तो आपका शरीर अभी भी प्रतिक्रिया दे रहा था जैसे कि यह वास्तव में हुआ था? हमारा शरीर वास्तव में यह महसूस करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि हमारी मानसिक कल्पना में क्या है?

visualization

परीक्षण के लिए भविष्य पेसिंग

  1. भविष्य में चार संभवित स्थितियों के बारे में सोचें, जिन्होंने पहले पुराने व्यवहार को ट्रिगर किया होगा । उदाहरण के लिए, लिविंग रूम में गंदगी देखना, फोन आना, कोई सहकर्मी आपको मदद करना आदि ।
  2. पहली स्थिति में कदम रखने की कल्पना करें। देखें, सुनें, महसूस करें (जैसे स्पर्श में ), गंध और/या स्वाद लें जो आप पहली स्थिति में अनुभव करेंगे, अपनी आंखों से । यह संदर्भ से जुड़ा है।(blogtopic : NLP kya hai)
  3. क्या परिवर्तन आप चाहते है? क्या आप उस तरह से प्रतिक्रिया करते हैं जैसा आप चाहते हैं?
  4. विचार करें कि इच्छित प्रतिक्रिया को उत्पन्न करने के लिए आपको और परिवर्तन करने की आवश्यकता है या नहीं? अगर हे तो इन चीजों की कल्पना करे।(blogtopic : NLP kya hai)
  5. अन्य तीन परिस्थितिओ के लिए चरण 2 से 4 दोहराएं ।

अब वापस आएं, और कल्पना करें और भविष्य में आपके द्वारा किए गए परिवर्तनों के साथ खुद को देखें ।

3. Swish pattern (स्विश पैटर्न) :

एनएलपी स्विश पैटर्न का उपयोग सीमित व्यवहार या अनचाही आदतों को तोड़ने के लिए किया जाता है । इसे उस विचार के पैटर्न को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो अनचाहे व्यवहार को इच्छित व्यवहार की ओर ले जाता है।

जैसे किसी सिगर्रेट पिने वाले इंसान को एक स्वस्थ ऊर्जावान और फिट दिखने वाला व्यक्ति के रूप में विज़ुअलाइज़ेशन करके उस इंसान के दिमाग को पुनः प्रोग्राम करना। जिससे उस व्यक्ति को सिगर्रेट छोड़ने में मदद मिलती हे । विज़ुअलाइज़ेशन के अलावा, इस अनुभव को बढ़ाने के लिए अक्सर श्रवण ध्वनि प्रभावों की कल्पना भी की जाती है ।

बहुत से लोग इस प्रक्रिया का उपयोग पब्लिक स्पीकिंग या प्रेजेंटेशन करने के दौरान घबराहट को दूर करने के लिए भी कर सकते हैं ।(blogtopic : NLP kya hai)

स्विश एनएलपी तकनीक :

  1. पहले फैसला करे की आप क्या बदलना चाहते हे ? अपनी कल्पना में इसकी बड़ी चमकती छवि उत्पन्न करे (जो आप नहीं चाहते हे) । फिर थोड़ी देर के लिए इसे अलग कर दे ।(blogtopic : NLP kya hai)
  2. इसके बाद उस चीज की छवि बनाए जो आप चाहते हे । अगर सिगर्रेट छोड़नी हे तो सोचे की आप व्यायाम कर रहे हे या आप कोई गेम खेल रहे । अपने आप को छवि में स्वस्थ शरीर के साथ देखे । इसको और गहराई से महसूस करने के लिए आप प्रेरणादायक गाना या ध्वनि का इस्तेमाल भी कर सकते हे । इसे भी दिमाग में थोड़ी देर के लिए अलग रख दे ।
  3. पहली छवि लें (जिससे आप छुटकारा पाना चाहते हैं) और इसे और भी बड़ा और उज्जवल बनाएं । अपने मन में सामने रखें । फिर इसके बजाय आप जो चाहते हैं उसकी छवि लें और इसे छोटा और दूरी पर रखें ।
  4. अब आप जो नहीं चाहते हैं उसकी उज्ज्वल छवि को दूरी में फेंक दें और ध्यान दें कि यह रंगीन छवि में छोटी हो रही है और ब्लैक एंड वाइट हो रही है। धीरे धीरे इस छवि को और छोटी करते हुए गायब करदे ।
  5. अब आप जो चाहते हैं उसकी छवि बनाएं ताकि यह जल्दी से उज्ज्वल और रंगीन हो जाए । आपके द्वारा चुनी गई किसी भी प्रेरणादायक ध्वनि को अब उज्ज्वल छवि की शक्ति में जोड़ने के लिए आवाज को बढ़ाए ।

3-5 बार इस क्रिया को दोहराएं । अगर आप इसे सही से करते हे तो जब भी आप सिगर्रेट के बारे में सोचेंगे तो आपका दिमाग इसकी छवि को हटाकर स्वस्थ , व्यायाम करने वाले व्यक्ति की छवि को उत्पन्न करेगा । आप ये तकनीक किसी भी प्रकार की नकारात्मक स्मृति को भुलाकर हकारात्मक परिस्थिति से बदलने के लिए भी कर सकते हे ।

4. Reframing (रिफ्रेमिंग) :

रिफ्रेमिंग NLP की एक और ताकतवर तकनीक हे । आप जानते ही हे की हमारे जीवन में कई सारि घटनाए होती रहती हे । जो हमें कई तरह से नुकशान पहुँचती हे परेशान करती हे । पर आप ये जान कर हैरान रह जायेंगे की असल में ये घटनाए नहीं , हमारे खुदके विचार ही हमें दुःख और दर्द पहुंचाते हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

अगर आप गहराई से देखे तो जीवन की ज्यादातर घटनाए हमारे लिए नुकशान न पहुचनेवाली होती हे । असल में हम हर एक परिस्थिति और घटना का क्या मतलब निकालते हे इसके ऊपर ये निर्भर करता हे । जैसे की अगर कुछ लोग की सुबह अच्छी नहीं जाती या सुबह को कुछ बुरा होता हे तो ये पुरे दिन को ही ख़राब मान लेते हे और परिणाम स्वरुप वो पुरे दिन ख़राब मूड में रहते हे ।

लेकिन क्या होगा अगर आप इसे दूसरे नजरिए से देखे और अपने आप को ये कहे की सुबह की एक मुश्किल को छोड़कर मेरा पूरा दिन बहुत बढ़िया जाने वाला हे । तो आपका दिन भी बहुत बढ़िया जायेगा । इसी तरह ने नजरिया अपनाने की प्रक्रिया को रेफ्रेमिंग कहा जाता हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

इसी सिदांत को आप कोई भी परिस्थिति में अमल कर सकते हे । अगर आप को किसी चीज का रास्ता नहीं मिल रहा हे तो आप निराश ना हो । अपना नजरिया बदले और सभी अलग अलग रास्तो को ढूढ़ने की कोशिश करे ।

रीफ़्रेमिंग रचनात्मकता का हिस्सा है: यह एक सामान्य घटना या चीज़ को लेकर इसे एक नए फ्रेम में डालने के बारे में है जो उपयोगी या आनंददायक हो सकता है । रीफ़्रेमिंग Six step reframing महत्ववपूर्ण तकनीक हे ।

Six step reframing

State management (मानसिक स्थिति नियंत्रण) :

इस मानसिक स्थिति नियंत्रण तकनीक में किसी व्यक्ति की भावनात्मक और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास करना शामिल है। मानसिक स्थिति वह विशेष स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति या वस्तु किसी विशिष्ट समय पर होती है ।हमारी मानसिक स्थिति हमारे लिए बहुत ही शक्तिशाली हो सकती हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

state
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सरल भाषा में इसे मूड कह सकते हे । ये ऐसी स्थिति हे जो हमारे दिमाग (विचार, कहानियां, छवियां, ध्वनियां, संवेदनाएं) और हमारा शरीर और हम इसके साथ क्या कर रहे हैं इसके ऊपर निर्भर करती हे । दिमाग और शरीर दोनों एक दूसरे पर प्रभाव डालते हे जिससे अलग अलग स्थिति का निर्माण होता हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

एक नकारात्मक या ‘संसाधनहीन’ स्थिति में, हमारे विकल्पों की सीमा सीमित होती है (और अक्सर उन कार्यों तक सीमित होती है । इसकी तुलना में ऊर्जावान स्थिति या किसी ‘प्रवाह’ की स्थिति में हम काफी उत्पादक और कुशल बन जाते हे । अच्छी और ताकतवर स्थिति में ही हम दुनिया की अद्भुत चीजों का निर्माण करते हे ।

मानसिक स्थिति को कैसे बदले ?

आप जानते ही हे की आपके मूड या मानसिक स्थिति को नियंत्रण करना आपके हाथ में ही हे । इसके लिए आपको जागृत रहना होगा और जानना होगा की आप हर वक्त केसा महसूस करना चाहते हे ।

सबसे पहले जाने की आप अभी किसी स्थिति में हो ?

जागरूक बनें कि हम एक नकारात्मक स्थिति में हैं और बिना शर्म, भय या क्रोध की भावना के इसे स्वीकार करते है।

अगला कदम कुछ एनएलपी प्रकार की प्रक्रिया का उपयोग करना है और फिर हमें बेहतर महसूस कराने के लिए हमारे स्थिति को बदलना है।(blogtopic : NLP kya hai)

स्थिति बदलने के लिए अक्सर बहुत प्रभावी तरीका शरीर की स्थिति को बदलना है । शरीर को सीधा करें, आगे देखें और नीचे की बजाय थोड़ा ऊपर देखें। आगे बढ़ो, अगर उचित है, मुस्कुराओ । जैसे की NLP पूर्वधारणाओं में देख चुके हे की मन और शरीर एक ही हे इसलिए किसी एक में बदलाव दूसरे को प्रभावित करता ही हे ।

ट्रिगर्स की पहचान करें

ट्रिगर एक क्रिया या ऐसी चीजें हैं (जैसे यादें, वस्तुएं, लोग) जो तीव्र नकारात्मक भावनाओं को पैदा करती हैं । जो प्रतिकूल भावनात्मक प्रतिक्रिया का कारण बन सकती है ।

उन सभी चीजों की पहचान करें जो आपको ट्रिगर करती हैं और उन्हें लिख लें ।(blogtopic : NLP kya hai)

यदि आपने एक नकारात्मक ट्रिगर का अनुभव किया है, तो इसे अनदेखा न करें। जो भी परेशान कर रहा है, उससे निपटना आपके लिए महत्वपूर्ण है। अपने नकारात्मक ट्रिगर का सामना करने से आपको इसे दूर करने में मदद मिल सकती है।

आपके मानसिक स्थिति उन छवियों पर निर्भर करते हैं जो आप परिस्थितियों या वस्तुओं को धारण करते हैं। इंद्रियों का उपयोग करके, अपने द्वारा बनाए गए मानसिक चित्रों को बदलें । उदाहरण के लिए, मानसिक तस्वीर नकारात्मक है, तो उसके आकार को कम करने का प्रयास करें ।

उस दिमाग में चल रही बातो को सुनें जिसमें आप संलग्न हैं, और इसे सकारात्मक और उत्थानशील रखने का प्रयास करें । अपनी दिनचर्या में सकारात्मक ट्रिगर बनाएं । (blogtopic : NLP kya hai)

न्यूरो-भाषाई प्रोग्रामिंग आपको प्रभावी मानसिक स्थिति के लिए आवश्यक आत्म-जागरूकता के प्रकार को विकसित करने में मदद कर सकती है । इसके आलावा भी कई ऐसी तकनीक हे जिनका उपयोग आप मानसिक स्थिति को ठीक करने में कर सकते हो । लेकिन आज के लिए बस इतना ही ।

Conclusion/

आशा करता हूँ आपको न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोगरामिंग के सभी सवालो के जवाब मिले होंगे । अगर अपने पूरा पढ़ा हे तो आपको आज पता चला होगा की NLP kya hai? NLP का क्या अर्थ होता हे और NLP की शुरुआत कैसे हुई ?

इसके आलावा आज के ब्लॉगपोस्ट में अपने NLP के सिद्धांत और पूर्वधारणाए भी जनि । और सबसे महत्वपूर्ण NLP की तकनीकों के बारे में भी जाना । NLP में और कई शक्तिशाली तकनीकी हे जो आपका पूरा जीवन बदल सकती हे । लेकिन जैसा की में पहले ही बता चूका हूँ , NLP एक बहुत बड़ा विषय हे ।(blogtopic : NLP kya hai)

इसे सिखने के लिए आप nlp practitioner के द्वारा सिखाया जानेवाला nlp course ले सकते हो । एनएलपी किसके लिए अच्छा है? क्यूंकि NLP सभी लोगो के लिए अच्छा हे जो अपने जीवन में वित्तीय, मानसिक विकास चाहते हे और खुदको प्रतिभाशाली बेहतर इंसान बनाना चाहते हे ।

मिलते हे sciencegyani के अगले ब्लॉग में तब तक के लिए विज्ञान के और ब्लॉग पढ़े और आर्टिकल अच्छा लगे तो लाइक,कमेंट और शेयर जरूर करे । धन्यवाद

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