Omicron-new-research

New virus

हेलो दोस्तों , New virus Omicron के बारे में तो आप जान ही चुके होंगे । अगर नहीं जानते हे तो Covid new variant हे जिससे आप मेरा दूसरा आर्टिकल पढ़ सकते हे जिसमे मेने इसके बारे में संक्षिप्त जानकारी दी हे ।

ये कोरोना के ये variant अब भारत ने भी आ चूका हे । अभी तक (24 दिसंबर सुबह ) भारत में इसके 358 केस हो चुके हे । और ये काफी फैलता जा रहा हे । ऐसे समय में इसकी रिसर्च से जुडी हुई जानकारी आपके लिए काफी लाभदायक हो सकती हे । तो आगे जरूर पढ़ते रहे ।

New virus Omicron की हालही में हुई रिसर्च और उसके विज्ञानं के ऊपर हम काफी जानकारी प्राप्त करेंगे । जो आपको कोरोना के चलते समझदार बनाएगी तो इसे जरूर पढ़े और शेर करे।

Omicron पर नयी रिसर्च (New research on New virus)

ये रिसर्च मैं हांगकांग विश्वविद्यालय(Hongkong university) से विज्ञान पर कुछ अपडेट करना चाहता हूं जिसका इस समय Omicron wave पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा है ।

अब हम सीधे कुछ विज्ञान पर चलते हैं जिसे मैं आज कवर करना चाहता था । इसलिए यहां हम देखते हैं कि यह ब्रोन्कियल मार्ग है और यह ब्रोन्कियल मार्ग का अस्तर है और यह ब्रोन्कस की दीवार है ।

HKUMed-2 (new virus)
HKUMed-2 (new virus)

अब यह कोशिकाओं के साथ कसकर पैक किया गया है यहाँ आप ये सभी छोटे नीले बिंदु यह कोशिकाएँ हैं। ऊपर दिखाई गयी इमेज (HKUMed-2 (new virus)) bronchial tube की पतली दिवारो की कोशिकाए दर्शाती हे ।

हॉन्ग कॉन्ग यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन ने ओमिक्रोन सार्स कोरोनवायरस 2 को मानव ब्रोन्कस में डेल्टा की तुलना में तेजी से और बेहतर तरीके से संक्रमित करते हुए पाया हे ।

respiratory system (new virus)
respiratory system (new virus)

तो यहाँ ब्रोन्कस में अब आप में से अधिकांश जानते हैं कि हमारे पास श्वासनली (Trachea) है जो गर्दन के माध्यम से हवा को नीचे ले जाती है और यह दाएं और बाएं मुख्य ब्रोन्कस में विभाजित हो जाती है और फिर ये उप-विभाजित हो जाती है ।

इसलिए यहां बाईं ओर शुरू में दो मुख्य मार्ग में उप-विभाजित होती है। फेफड़ों के पालियों में जाने वाले तीन मुख्य मार्गों में उप-विभाजित होते हैं और फिर ये छोटे और छोटे ब्रोन्कियल मार्ग में उप-विभाजित होते हैं जिन्हें हम ब्रोन्कियल ट्री कहते हैं।

ब्रोन्कियल ट्री फेफड़े के मांस-तंतु (tissue) में हवा ले रहा है और फेफड़े के मांस-तंतु मोटे तौर पर ये छोटे सूक्ष्म एल्वियोली(Alveoli) हैं । सूक्ष्म स्तर पर ये वास्तव में लाखों हैं ।

HKUMed-2 (new virus) पहली इमेज में यहां लाल बिंदु जो हम यहां देख सकते हैं वह वायरस के लिए मार्कर है जिसे इन शोधकर्ताओं ने पहचाना है।

लेकिन उन्होंने जो महत्वपूर्ण बात पहचानी है, वह यह है कि ब्रोन्कियल मार्ग में वायरस बड़ी संख्या में नकल करते हुए पाया जा रहा है।

ब्रोन्कियल मार्ग दाएं और बाएं मुख्य ब्रोन्कस में विभाजित होकर और उपविभाजित होकर छोटी ब्रांकाई फेफड़ो के खंडो में जाती हे ।

सूक्ष्म वायुमार्ग, ये एल्वियोली(alveoli) अंगूर के खोखले गुच्छों की तरह होते हैं, ये बड़े सतह क्षेत्र जहां से वायु विनिमय होता है, इसलिए सामान्य रूप से ऑक्सीजन एल्वियोली से रक्त में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से वापस एल्वियोली(alveoli) में जाती है।

पर ऐसा लग रहा हे की ओमिक्रोन वायरस यहाँ नीचे उतरने और यहाँ फेफड़ों के मांसतंतु में बढ़ने के बजाय, वायरस वास्तव में ब्रोन्कियल मार्ग में बढ़ रहा हे ।

अब आखिर ये समझने के बाद आइए देखें कि वे इस शोध में क्या कह रहे हैं, यह पहली जानकारी है कि ओमाइक्रोन कोरोनावायरस 2 मानव श्वसन पथ(respiratory tract) को कैसे संक्रमित करता है।

क्या कहती हे New रिसर्च ?

  • ओमीक्रोन New virus मानव ब्रोन्कस में डेल्टा की तुलना में 70 गुना तेजी से संक्रमित और गुणा करता है। sourcofstudy

यहां बड़ी संख्या में वायरस उत्पन्न होते हैं इसलिए बड़ी संख्या में वायरस वास्तव में बहुत जल्दी बाहर निकल जाएंगे । जिससे एक यह भी परिकल्पना बनती हे की संपर्क में आने वाले इंसान को यह जल्द ही संक्रमित कर सकती हे । जो समझा सकता है कि ओमाइक्रोन तेजी से क्यों संचारित हो सकता है ?

  • फेफड़ों में New virus ओमीक्रोन संक्रमण मूल कोरोनावायरस 2 की तुलना में काफी कम है। sourceofstudy

इसलिए यह यहां फेफड़े के मांसतंतु में नहीं जा रहा है, इसका मतलब है कि ये एल्वियोली को अच्छी स्थिति में रहने की उम्मीद कर सकते हैं ताकि हवा अंदर और बाहर जा सके और गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम(acute respiratory syndrome) ना हो । जो पहले कोरोना से होने वाली कई मोत के लिए जिन्मेदार थी ।

जो सूचित करता हे की ये रोग कम गंभीर हो सकता हे। तो यह वैज्ञानिक कारण है कि ऐसा क्यों हो सकता है या ऐसा लग रहा है कि ओमाइक्रोन डेल्टा की तुलना में कम रोगजनक है।

ज़ाहिर हे की उस पर और अधिक आना बाकी है लेकिन यह इस समय एक आशावादी दृष्टिकोण दर्शाता हे ।

  • शोध वर्तमान में प्रकाशन के लिए सहकर्मी समीक्षा के अधीन है।

होन्ग कोंग यूनिवर्सिटी Ex vivo के प्रयोगों में अग्रणी रहे हे । और ईसि प्रकार से ही ओमीक्रॉन का प्रयोग (EX vivo) किया गया । sourceofistudy

सामान्य तोर चार प्रकार के प्रयोग या स्टडी देखी जाती हे । जिसमे In silico (इन सिलिको), in vitro (इन विट्रो), Ex vivo (एक्स वीवो), in vivo (इन वीवो) को शामिल किया जाता हे ।

  1. In silico (इन सिलिको) : प्रयोगों में In silico (इन सिलिको) प्रयोग वो हे जो कंप्यूटर या कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग करके किए जाते हैं । जैसे के MRI मशीन या कंप्यूटर प्रोग्राम से होने वाले टेस्ट और स्टडी ।

2. In vitro (इन विट्रो) : इन विट्रो प्रयोगों को जीवित जीवों के बाहर एक प्रणाली में किया जाता है जिसे इन विट्रो प्रयोग कहा जाता है । इन विट्रो प्रयोग में कोशिकाए और मांसतंतु को शरीर से निकालकर पेट्री डिश में परिक्षण किया जाता हे ।

petri dish
petri dish

3. Ex vivo (एक्स वीवो) : आप यहाँ देख रहे हैं कि x शब्द का अर्थ एक जीवित शरीर के बाहर है, ये प्रयोग एक जीवित शरीर से बाहर किए जाते हैं और इन विट्रो प्रयोग की तरह होते हैं लेकिन एक छोटा सा अंतर होता है इन दोनों में । एक्स वीवो प्रयोग कृत्रिम वातावरण में किये जाते हे और प्राकृतिक परिस्थितियों में न्यूनतम परिवर्तन के साथ ।

4. In vivo (इन वीवो) : इन विवो प्रयोगों , वास्तव में वे प्रयोग हैं जो पूरे जीवित जीव के अंदर किए जाते हैं । पशु परीक्षण और नैदानिक परीक्षण In vivo (इन वीवो) के माध्यम से होते हे ।

और रिसर्च में कहा गया की :

  • डॉ चान और उनकी टीम ने New virus ओमीक्रोन सार्स कोरोनावायरस 2 को सफलतापूर्वक अलग कर दिया । और उन्होंने इसे प्रयोगात्मक रूप से डेल्टा वैरिएंट के साथ संक्रमण की तुलना करने के लिए इस्तेमाल किया ।

इसलिए उन्होंने ओमाइक्रोन को शायद पेट्री डिश में लगाया होगा और देखा होगा कि यह दोनों मांसतंतु (फेफड़ो और ब्रोन्कियल मार्ग के मांसतंतु )के साथ कैसे इंटरैक्ट करता है और उन्होंने डेल्टा वैरिएंट पेट्री डिश में लगाया होगा ।

देखा होगा कि यह दोनों मांसतंतु के साथ कैसे इंटरैक्ट करता है । ऐसे ही शायद उन्होंने पाया होगा कि ओमाइक्रोन ब्रोन्कियल मार्ग में अधिक तेज़ी से बढ़ रहा है लेकिन एल्वियोली में ही फेफड़े के मांसतंतु में बहुत धीरे-धीरे ।

  • इसके विपरीत, मूल सार कोरोनावायरस 2 की तुलना में मानव फेफड़े के मांसतंतु में ओमीक्रोन संस्करण कम कुशलता से (10 गुना कम ) फैला । जो रोग की कम गंभीरता का सुझाव दे सकता है
  • Dr.Chan ये भी कहते हे की यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मनुष्यों में रोग की गंभीरता न केवल वायरस प्रतिकृति से निर्धारित होती है बल्कि संक्रमण के प्रति मानव प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (immune response )से भी निर्धारित होती है।

यह भी नोट किया गया है कि बहुत अधिक लोगों को संक्रमित करने से एक बहुत ही संक्रामक वायरस अधिक गंभीर बीमारी और मृत्यु का कारण बन सकता है, भले ही वायरस स्वयं कम रोगजनक हो।

दूसरे शब्दों में, जैसा कि कहा गया हैं कि एक ही समय में इतने सारे लोग संक्रमित हो सकते हैं, एक छोटा प्रतिशत भी एक बहुत बड़ी संख्या हो सकता है और इसलिए सतर्क होना सही है।

ओमीक्रोन संस्करण से समग्र खतरा बहुत महत्वपूर्ण होने की संभावना है । तो अपना ध्यान जरूर रखे । नियमित रूप से हाथ धोये, मास्क पहने और सावधानी बरते ।

आशा करता हूँ New virus ओमीक्रोन के स्टडी के बारे में ये आर्टिकल आपको पसंद आया होगा । अगर पसंद आया हो तो शेयर करे कमेंट करे । और ऐसे ही पढ़ते रहे । थैंक यू फॉर रीडिंग ।

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