Mind body connection

हेलो दोस्तों, क्या आप जानते हे Mind body connection को बेहतर बनाकर आप कितना बेहतर जीवन जी सकते हे ? क्या आप जानते हे कई सारे रोगो की जड़ हमारे दिमाग और शरीर का सम्बन्ध हे। क्या आप जानते हे आपका दिमाग के विचार , आपके भावनाए (emotions), आपके beliefs , और आपके attitude का आपके शरीर पर केसा प्रभाव पड़ता हे ? Mind और body connection आर्टिकल में हम इन सब सवालों के जवाब जानने की कोशिश करेंगे। तो चलिए पता लगते हैं के ऐसा क्यों हे ?

सबसे पहले हम जानेगे के Mind और body connection क्या हे? उसके बाद हम जानेंगे के उसके पीछे क्या विज्ञानं हे और कैसे mind हमारे शरीर और स्वास्थ्य पर असर करता हे और कैसे हम उसे बेहतर बनाए, आगे जानेंगे कुछ टिप्स और उपाय।

1. what’s mind body connection :

Mind-body connection kya hota he ?

Mind body connection
Mind body connection

Mind body connection यानि हमारे दिमाग के विचार, मान्यताए , इमोशन और ऐटिटूड का हमारे शरीर पर अच्छा और बुरा असर । दूसरी तरफ हमारे शरीर की खानपान , व्यायाम , यहाँ तक की जो स्थिति में आप बैठते उनका भी दिमाग के ऊपर अच्छा और बुरा असर होता हे।

आपने ये जरूर सुना होगा के ज़्यादा चिंता करने से टेंशन लेने से कई बीमारिया होती हे। जो कई बार अनजाने में होता हे , इंसान कई बार जनता ही नहीं के उसकी बीमारी का कारन stress भी हो सकता हे। स्ट्रेस की वजह से डायबिटीज, ब्लड प्रेसर, सर दर्द, कमर दर्द या नींद न आना जैसी बीमारिया हो सकती हे।

लेकिंग क्या होगा जब आप हमेशा हस्ते रहे , खुश रहे तो आप हमेशा चिंतामुक्त रहेंगे और आपको ऐसी बीमारिया नहीं होगी। क्युकी हमारे विचारो का हकारात्मक असर भी शरीर पर होता हे। जब हम नियमित रूप से व्यायाम करे ,पौष्टिक खाना खाये उसका भी अच्छा असर हमारे दिमाग पर होता हे। शरीर और दिमाग के बिच बहोत ही गहरा सम्बन्ध हे जो हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी जरूरी हे।

पहले के समय में दिमाग और शरीर को अलग माना जाता था। लेकिंग आज के समय में डॉक्टर सिर्फ शारीरिक लक्षण पे ही ध्यान नहीं देते हे बल्कि मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देते हे जिससे इंसान शारीरिक रूप से ही नहीं [पर मानसिक रूप से भी स्वस्थ महसूस करे। जिसे emotional health कहते हे। वैज्ञानिकों ने तो अभी अभी समझना शुरू किया हे कि हमारे emotions स्वास्थ्य और दीर्घायु को कैसे प्रभावित करती हैं ।

2. Science behind mind body connection :

मन और शरीर के सम्बन्ध का विज्ञानं

विज्ञान की रिसर्च से Mind body connection में ये पता लगाया जा चूका हे के हमारे शरीर के अंदर बहोत बड़ा information network बना हुआ हे। बिलकुल इंटरनेट की तरह। जैसे इंटरनेट की मदद से एक जगह से दूसरी जगह पे जानकारी भेज सकते हे वैसे ही। हमारे शरीर में एक जगह से दूसरी जगह पे मेसेज भजे जाते हे। जिसको दिमाग के द्वारा नियंत्रित किया जाता हे। क्यों की हमारे शरीर के हर एक अंग हमारे दिमाग के साथ जुड़े हुए होते हे ये तो आप जानते ही होंगे।

ये भी माना जाता हे के हमारे बॉडी के आंतरिक अंग एक दूसरे के साथ signal भेजकर जैसे बात कर सकते हे। Howard Hughes Medical Institute के मुताबिक 8k माइक्रोस्कोप की मदद से शरीर के अंगो में कई तरह के signaling molecules पाए गए हे जो हर तरह के मेसेज शरीर के अलग अलग भागो में पहोचाते हे। जैसे हमारे शरीर के आंतो में रहे हुए signaling molecules दिमाग़ को ये मेसेज भेज रहे होंगे की “खाना यहाँ पहोच गया हे और पोषक तत्व (nutritions)को सोख लिया जा रहा हे।”

signaling molecules
message sending molecules in green

आज के समय में विज्ञानिको के द्वारा 100 से ज्यादा सिग्नलिंग मोलेक्युल्स शरीर में पाए गए हे। जो इस तरह के मेसेज पहुंचाते हे। हमारे शरीर में जब पर्याप्त मात्रा में खाना जाता हे तब हमारे Fat cells (चरबी) भी दिमाग को signaling molecules भेजती हे। जिससे दिमाग को पता चल जाता हे की हमारे शरीर को पर्याप्त मात्रा में खाना मिल गया हे जिससे हम ज़्यादा खाने से बच जाते हे। हमारा दिमाग इन signaling molecules का उपयोग करके neurons के द्वारा दिमाग में बातचीत करता हे जिससे हमारे शरीर में अलग अलग तरीके के emotions (भावनाए) महसूस होते हे।

वैज्ञानिक अध्ययन से लगातार यह खुलासा कर रहे हैं कि भावनाओं से जुड़े हार्मोन और signaling molecules (रासायनिक संदेशवाहक) का शारीरिक प्रभाव हो सकता है। वे हमारे blood pressure, heart rate, नींद के पैटर्न और यहां तक कि हमारी भूख को भी प्रभावित कर सकते हैं।

कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने हमारी भावनात्मक(emotional) और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच के संबंध की जांच की है, और समय-समय पर, ये साबित हुआ हे के मन और शरीर के बीच घनिष्ठ संबंध हे।

3. How mind body connection affect you health :

मन शरीर का संबंध आपके स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है ?

अपने ये ज़रूर महसूस किया होआ की जब भी आप किसी गंभीर परिस्थिति में होते हे तब आप की धड़कने बढ़ जाती हे। घभराहट होने लगती हे तो ऐसा क्या होता हे ? मान लीजिए की कोई आपके ऊपर हमला करे तो आप बचने के लिए भागने की कोशिस करेंगे जिसके लिए आपको ताकत चाहिए।

तीव्र तनाव की प्रतिक्रिया में, हार्मोन अचानक रिलीज हो जाता है। हमारा शरीर दो हार्मोन जारी करता है: एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल। जिन्हे तनाव हार्मोन के रूप में जाना जाता है, वे हमें एनर्जी बढ़ा देने वाले हार्मोन हैं (जिसे एड्रेनालाईन रश के रूप में जाना जाता है) ताकि हम जल्दी से खतरनाक स्थितियों से बाहर निकल सकें।

प्रतिक्रियाओं की इस श्रृंखला के परिणामस्वरूप हार्ट रेट , ब्लड प्रेशर और सांस लेने की दर में वृद्धि होती है। खतरा खत्म होने के बाद, शरीर को अपने पूर्व-उत्तेजना के स्तर पर वापस आने में 20 से 60 मिनट का समय लगता है। इन हार्मोनों को बार-बार रिलीज़ होने से लम्बे समय में शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे हमारी रोगप्रतिकारक शक्ति कमजोर हो सकती हे , कब्ज़ की शिकायत हो सकती हे , लगी हुई चोट का धीरे-धीरे ठीक होना जैसी प्रोब्लेम्स आ सकती हे।

नेगेटिव सोचना भी हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल सकता हे। खुदके बारे में बुरा बोलना , हमेशा बुरा ही होगा ऐसा सोचना , बिना किसी चीज़ बारे में जाने नेगेटिव बोलना हमें स्वस्थ होने से रोक सकता हे। जब डॉक्टर से रोग का इलाज हो सकता हे तो हमें नेगेटिव सोचने की बिलकुल जरुरत नहीं हे। कई बार ऐसी सोच हमारे बीमारी के ठीक होने में बाधा बन जाती हे।

उसकी नेगेटिव सोच के गंभीर स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं, और इस प्रकार के सोच की पैटर्न को तोड़ना मुश्किल है।

4. Paths to improve Mind body connection:

Mind और body के connection को बेहतर बनाने के उपाय:

Pressure and stress is happening because you don’t know how to conduct your body, mind, and emotions.

sadhguru

1.Yoga and Meditation:

स्टडी से पता चला हे के योग में की गयी श्वाच्छोश्वास की पक्रिया और मैडिटेशन की वजह से शरीर की विश्राम प्रतिक्रिया(relax response) सक्रिय हो जाती हे। योग की वजह से GABA स्तर में बढ़ोतरी होती हे। GABA का स्तर दिमाग को रिलैक्स करने में मदद करता हे। GABA एक तरह का signaling molecule हे जो दिमाग में एक neuron से दूसरे neuron तक मेसेज पहुंचाते हे ।

Yoga in mind body connection
Yoga in mind body connection

3 महीने की एक स्टडी में कुछ लोगो को हप्ते में 3 दिन 1 घंटा चलने के लिए कहा गया और दूसरे ग्रुप को उतने ही दिन १ घंटा योग करने के लिए कहा गया। ३ महीने के बाद चेक अप करने पर योग करने वाले ग्रुप में GABA के स्टार ने बढ़ोतरी देखि गयी और लोगो के मूड में सुधार और चिंता में कमी देखि गयी।

Meditation in mind body connection
Meditation in mind body connection

किशोरों के लिए Meditation और भी अधिक महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनका दिमाग अभी भी विकसित हो रहा है। वैज्ञानिकों ने पाया कि ध्यान योग कक्षा में हाई स्कूल के छात्रों ने उनके क्लास के बाद उन्होंने ज्यादा एनर्जी महसूस की और उनके गुस्से चिंता और तनाव में कमी महसूस की गयी।

2. Visualization:

Visualization का मतलब होता हे किसी भी चीज की मानसिक छवि का निर्माण। अपने मन में ही चीज़ो की ऐसी कल्पना करना जैसा आप उन्हें होते हुए देखना चाहते हे। जो Mind body connection को बेहतर बनाने में काम आ सकता हे। आप जानते ही होंगे की दिमाग का काम सोचना हे और उसके मुताबिक हमारे शरीर के सभी अंग काम करते हे। लेकिंग कई बार दिमाग ये पता नहीं लगा सकता के हमारा शरीर सही में काम कर रहा हे या सिर्फ visualize कर रहा हे। कई research के मुताबिक ये साबित हुआ के किसी चीज़ को करने से पहले उस चीज़ के बारे में visualize करने से उस काम को सफलता पूर्वक करने की संभावना बढ़ जाती हे।

athlete
Athlete

रिसर्च के मुताबिक ओलिंपिक खिलाडी को खेल खेलने से पहले उनके मन में ही खेल खेलने के बारे में visualize करने के लिए कहा गया। परिणामस्वरूप पाया गया के visualization की मदद से उन्हें अपने खेलमे ज़्यादा जित हासिल हुई। कई बार तो उन्होंने खेल के लिए प्रैक्टिस भी नहीं की थी। तो जब भी आप ऐसा कोई काम करने जा रहे हो जिसके बारे में आप बेचैन हों तो ये काम जरूर करे आप अपने आपको ज़्यादातर बार सफल होता हुआ पाएंगे। चाहे वो जॉब का इंटरव्यू हो या प्रेज़न्टेशन या कोई और चीज़।

3. Nutrition:

nutrition in mind body connection
Nutrition in mind body connection

जैसे की मेने पहले बताया हम जो खाते हे उनका भी Mind body connection के ऊपर गहरा असर होता हे। खासकर खाने का हमारे मूड पर बहुत गहरा प्रभाव होता हे। कई पोषक तत्त्व (nutrition) हमारे मानसिक स्वास्थ्य के साथ जुड़े हुए हे। सेरोटिन नामक हॉर्मोन जो हमारे भाव और मूड को नियंत्रित करता हे। जिसमे से 90 % सेरोटिन हमारे पेट की दीवारों में पाया जाता हे। इसलिए उसको दूसरा दिमाग या belly brain भी कहते हे।

जानकारी ज्यादातर आंत से मस्तिष्क तक जाती है, न कि इसके विपरीत। इसकी वजह से , वैज्ञानिको ने पाया है कि जिनका पेट स्वस्थ हे वो चिंता और अवसाद(depression) से कम पीड़ित हे। इसके अलावा, जानवरों और लोगों दोनों के अध्ययन से पता चलता है कि आंत में खराब बैक्टीरिया को अच्छे बैक्टीरिया से बदलने से मूड और इमोशंस में काफी बदलाव आ सकता है।

4. Other Mind Body Therapies:

Mind body connection उपचार तकनीकें हैं जो विश्राम को बढ़ावा देती हैं । ये उपचार मन को प्रभावित करने के लिए शरीर का उपयोग करते हैं, और इसके विपरीत। कुछ सामान्य मन-शरीर उपचारों में शामिल हैं :

  • Acupuncture : माना जाता है कि Acupuncture points केंद्रीय तंत्रिका तंत्र( nervous system) को उत्तेजित करते हैं। जो, मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क में रसायनों को छोड़ता है। ये रासायनिक परिवर्तन से शरीर प्राकृतिक रूप से ठीक होता हैं और शारीरिक और मानसिक कल्याण को बढ़ावा दे सकते हैं।
Acupuncture
Acupuncture
  • The Art Therapy : कई बार पेशंट मानसिक रुप् से परेशान होने के कारण अपने प्रोब्लेम्स को अच्छे से लोगो के साथ बात नहीं पते हे जिसकी वजह से आर्ट थेरेपी का उपयोग किया जाता हे। पेशंट के द्वारा उन्हीके विचार को के माध्यम से जानकर उनके मानसिक सारवार में काफी मदद मिलती हे। उनको ड्राइंग या पेंटिंग करने के लिए बोला जाता हे। कई बार उनको ड्राइंग या पेंटिंग के बारे में सवाल पूछकर उनकी मानसिक सारवार की जाती हे। कई बार उसमे नृत्य और संगीत जैसी कलाओ का भी उपयोग होता हे।
  • Cognitive Behavioral Therapy : Cognitive Behavioral Therapy में इस बात पर ध्यान दिया जाता हे के कैसे व्यक्ति की एक ही तरह की नेगेटिव सोचने की आदत को बदला जाये। इसका मुख्या ध्येय यही होता हे की अलग अलग तकनीक के द्वारा व्यक्ति को हकारात्मक सोच और व्यव्हार की आदत दिलाई जब जब तक वो अपनेआप ऐसे सोचने लगे।
  • Hypnosis : सम्मोहन विशेष रूप से कल्पना और कल्पना को विकसित करने के लिए स्व-निर्देशित सुझावों का उपयोग करता है। सम्मोहन चिकित्सा आपके सोचने और महसूस करने के तरीके और आपके शरीर के कुछ स्थितियों में प्रतिक्रिया करने के तरीके में बदलाव करने में मदद करती है।
  • Biofeedback : Biofeedback में आपके शरीर पर एलेक्ट्रोनीक सेंसर्स लगाए जाते हे जिससे आपके शरीर के बारे में जानकारी मिलती हे जिन्हे डॉक्टर के द्वारा नोट किया जाता हे। जिसके द्वारा आप शरीर में क्या हो रहा हे कैसे हो रहा हे पता चल सके। यह जानकारी आपको शरीर के कुछ कार्यों पर बेहतर नियंत्रण करने और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने में मदद कर सकती है।

5.Conclusion of Mind body connection :

Mind body connection की बाते भारत जैसे देश के लिए नयी नहीं हे। ऋषि मुनिओ के समय में भी मन और शरीर को एक माना जाता था। हमारे देश ने ही योग और मैडिटेशन का तोफा पुरे विश्व को दिया हे। ये इस बातका सबुत हे।

हमारे शाश्त्रो में भी कहा गया हे के इंसान के मन और शरीर के बिच के असंतुलन की वजह से ही मनोवैज्ञानिक समस्याएं खड़ी होती हे और जैसे-जैसे व्यक्ति सच्चे व्यक्तित्व के संपर्क में आता है,मानसिक समस्याएं दूर होती हैं। हमारे शाश्त्रो के अलग-अलग सिद्धांत स्वस्थ और अस्वस्थ व्यक्तित्व के बीच के अंतर को पहचानने में मदद करते हैं और यह दिखाते हे के व्यक्तित्व को स्वास्थ्य में कैसे बदला जा सकता है।

सरल भाषा में देखा जाये तो ऐसा कहा गया हे के आपकी पर्सनालिटी और सोच का आपके स्वास्थ्य के साथ बहुत गहरा सम्बन्ध हे। जैसा आपका व्यक्तित्व ऐसा आपका स्वभाव और सोच और वैसा ही असर आपके शरीर पर होता हे। और Mind body connection को बेहतर बनाना यानि अपने जीवन को और आनंदमय बनाना। और उसका सबसे आसान तरीका हे योग और ध्यान। तो क्या आप अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आजसे योग और ध्यान करेंगे ?

Interesting topics from the blog : sociology , Biology , Deep learning

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