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जैव विविधता

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जैव विविधता

हेलो दोस्तों , क्या हाल है ? आज हम जैव विविधता (biodiversity) के बारे में काफी जरुरी बातो की जानकारी प्राप्त करेंगे ।

जैव विविधता की जानकारीमे, में आपसे बात करूँगा की कैसे ये हमारे लिए और इस पारिस्थितिक तंत्र के लिए फायदेमंद हे और क्यों ये इतनी महत्वपूर्ण हे उसके बारे में जानेंगे ।

लेकिंन पूरी बात जानने से पेहले जैव विविधता यानि की अंग्रेजी में कहे तो Biodiversity क्या हे ये पूरी तरह से समझना काफी जरुरी हे । तो क्यों न आगे बढे।

जैव विविधता क्या हे ? (biodiversity in Hindi)

Biodiversity शब्द की उत्पति 1986 में हुई । Biodiversity‘ शब्द का जन्म 1980 के दशक में वैज्ञानिक क्षेत्रों, जेनेटिक इंजीनियरिंग और संरक्षण जीव विज्ञान(Conservation Biology) के उद्भव के साथ हुआ है।

जैव विविधता के जनक कौन है?

हावर्ड यूनिवर्सिटी के Edward O. Wilson को जैवविविधता के जनक माने जाते हे ।

और इन सब जिवो में विविधताओ के कारण हमें जरुरी चीजो जैसे खाना , दवाईआ प्राप्त होती हे ।

Biodiversity meaning in Hindi

जैव विविधता यानि एक ही जगह पे अलग अलग जाती के जीवो की संख्या । जिस में हमारी प्रकृति को बनाने वाले अलग –अलग जाती के प्राणी , पेड़-पौधे , कवक (Fungi) और सुष्मजीवो को भी शामिल किया जाता हे। ये सभी जिव पारिस्थितिक पर्यावरण में संतुलन बनाय रखने के लिए एक साथ रहकर काम करते हे ।

सरल सब्दो में कहा जाये तो जैव विविधता का मतलब जैविक विविधता । यानि की पृथ्वी पे रहने वाले सभी जीवो की प्रजातिओ में विविधता जिसमे पेड़ और पोधो को ही शामिल किया जाता हे ।

लेकिंग biodiversity सिर्फ प्रजातिओ में विविधता तक सिमित नहीं हे । इसमें आनुवंशिक विविधता(genetic diversity), पारिस्थितिकी तंत्र विविधता(ecosystem diversity) को भी देखा जाता हे ।

जैव विविधता के प्रकार (Types of Biodiversity)

1. प्रजातीय विविधता (species diversity)

प्रजातीय विविधता यानि प्रजातिओ में विविधता और प्रजातिओ की विपुलता या भरमार ।

प्रजातीय विविधता को जानने के लिए पारिस्थिक पर्यावरण में प्रजातिओ की संख्या को ध्यान में लिया जाता हे । ये भी देखा जाता हे की इस जगह पे हर एक प्रजाति कितनी मात्रा में मौजूद हे ।

जिससे लुप्त हो रही प्रजातिओ के संरक्षण के लिए कोशिस की जा सके और पारिस्थितिक पर्यावरण में संतुलन बना रहे ।

प्रजातीय विविधता तभी बराबर मानी जाती हे जब एक ही निवासस्थान पर हर एक प्रजाति के जिव बराबर मात्रा में पाए जाते हो । जिनमे दो पेहलु को ध्यान में रखा जाता हे ।

1 .प्रजातीय समृद्धि (Species richness)

यह एक समुदाय में पाई जाने वाली प्रजातियों की संख्या का माप है।

जैसे की एक जगह पे पेड़-पोधो की 25 प्रजातियां पायी जाती हे और दूसरी जगह पे 90 पेड़-पोधो की प्रजातियां पायी जाती तो दूसरी जगह पे प्रजातीय समृद्धि ज्यादा मानी जाएगी ।

जो पर्यावरण बड़ी संख्या में प्रजातिओ के लिए अनुकूल होता हे उन जगहों पे प्रजातीय समृद्धि ज्यादा देखने को मिलती हे जैसे उष्णकटिबन्धीय जंगल ।

2. प्रजातीय समता (Species evenness):

प्रजाति समरूपता एक क्षेत्र की विभिन्न प्रजातियों के सापेक्ष विपुलता का एक माप है ।

यदि सदस्यों की संख्या प्रजातियों से प्रजातियों में एकसमान होती है, तो इसे उच्च समता कहा जाता है। और अलग अलग प्रजाति में रहने वाले सदस्यों की संख्या भिन्न हो तो कम समता या समरूपता मानी जाती हे ।

इसे हम उदहारण से समझते हे :

उदहारण के लिए एक जंगल में 3 टाइगर , 7 चीते और 2 हाथी हे और दूसरे जंगल में 6 टाइगर , 5 चीते और 6 हाथी हे तो दूसरे जंगल की प्रजातीय समरूपता ज्यादा कहलाएगी । क्यूंकि दूसरे जंगल में सभी प्रजातिओ में सदस्यों की संख्या एकसमान या उसके आसपास हे ।

कई बार जंगलो में प्रजातिओ की संख्या ज्यादा पर प्रजातिओ में सदस्यों की संख्या अलग अलग होती हे । तो कई बार इससे उल्टी परिस्थिति देखि जाती हे ।

2. आनुवंशिक विविधता (Genetic diversity)

आनुवंशिक विविधता का मतलब किसी एक प्रजाति, समूह, या समुदाय के सदस्यों के बीच आनुवंशिक संरचना में भिन्नता होता हे ।

जैव विविधता
जैव विविधता

जैसे मातापिता के जीन के संयोजन से उनके गुण वंशज में देखे जाते हे । वैसे अनुवांशिक विविधता बनाए रखने के लिए एक ही प्रजातिओ के प्राणिओ में नर और मादा के अलग जीन को प्रजनन के माध्यम से संयोजित करके वंशज में नए बदलाव देखे जा सकते हे ।

जिसके आलावा अनुवांशिक विविधता के लिए जीन का म्युटेशन भी जिन्मेदार हे ।

जिसका सबसे उत्तम और सामान्य उदहारण हे कुत्ते । कई बार इनको दूसरे जाती के कुत्ते के लक्षण पाने के ब्रीड किया जाता हे ।

इसके आलावा अलग जाती के कमल के फूल , अनाज और कई तरह के सेब में विविधता देखने को मिलती हे जो अनुवांशिक विविधता के उदहारण हे ।

3. पारिस्थितिक विविधता (Ecological diversity)

पारिस्थितिक विविधता पारिस्थितिकी तंत्र और आवास में आधारित विविधता हे।

पारिस्थितिकी तंत्र पृथ्वी के जीवित प्राणिओ ,सुष्म जीवो और भौतिक घटको जैसे मिट्टी , पानी और ऋतु कैसे एक दूसरे को प्रभावित करते हे उसको दर्शाता तंत्र हे ।

भारत की बात करे तो पारिस्थितिक विविधता में भारत काफी आगे हे । क्यूंकि हमारे कई अलग अलग भू-भौगोलिक क्षेत्र मौजूद हे जहा अलग अलग जीवो के आवास देखने को मिलते हे ।

जैसे के भारत में वर्षावन(rainforest), रेगिस्तान, आर्द्रभूमि(wetlands), पर्णपाती वन(deciduous forests), घास के मैदान(grasslands), आदि क्षेत्र देखने को मिलते हे ।

अब परिस्तितिक विविधता के तीन प्रकार हे ।

1. अल्फा विविधता (Alpha diversity)

अगर किसी एक ही पारिस्थितिकी प्रणालि(समुदाय) के बिच अगर विविधता देखि जाती हे तब इसे अल्फा विविधता कही जाती हे । उदहारण के लिए सिर्फ रेगिस्तान में पायी जाने वाली प्रजातिओ के बिच की विविधता ।

2. बीटा विविधता (Beta diversity)

अगर किसी दो पारिस्थितिकी प्रणालियों(समुदायो ) के बिच अगर विविधता देखि जाती हे तब इसे बीटा विविधता कही जाती हे । उदहारण के लिए वर्षावन(rainforest) और पर्णपाती वन(deciduous forests) दोनों के बिच में पेड़-पोधो की प्रजातिओ में विविधता ।

3. गामा विविधता (Gamma diversity)

अगर भौगोलिक क्षेत्र के भीतर विभिन्न पारिस्थितिकी प्रणालियों में जो सब मिलाकर भिन्नता देखि जाती हे तब इस विविधता को गामा विविधता कही जाती हे । जिसे क्षेत्रीय विविधता भी कहते हे ।

उदहारण के लिए कोई क्षेत्र में वर्षावन(rainforest), रेगिस्तान, आर्द्रभूमि(wetlands), पर्णपाती वन(deciduous forests), घास के मैदान(grasslands) जैसे सभी के बिच कुल मिलाकर देखि जाने वाली विविधता ।

कार्यात्मक विविधता (functional diversity):

जिस तरह से प्रजातियाँ व्यवहार करती हैं, भोजन प्राप्त करती हैं और एक पारिस्थितिकी तंत्र के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करती हैं, उसे कार्यात्मक विविधता के रूप में जाना जाता है ।

पारिस्थितिक तंत्र की कार्यात्मक विविधता को समझने का फायदा पारिस्थितिकीविदों को होता हे। जो इस विविधता को बचाने या पुनर्स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि प्रजातियों के व्यवहार और भूमिकाओं को जानने से खाद्य चक्र या पारिस्थितिक तंत्र की समस्याओ को ढूंढा जा सकता हे ।

जैव विविधता का महत्व (importance of Biodiversity)

जैव विविधता का हमारे जीवन में काफी महत्व हे क्यूंकि ये हमारे सरे काम आसान कर देती हे । हमारे जीवन की सारी मूल ज़रूरियाते जैविक विविधता के कारन ही पूरी होती हे । और इससे हमें खाना , दवाई , फूल, ईंधन जैसे कई प्राकृतिक संसाधन मिलते हे।

जैव विविधता का महत्व
जैव विविधता का महत्व

उसके साथ साथ पारिस्थितिक सेवाएं जैसे हवा और पानी का शुद्धिकरण, जैव विविधता का रखरखाव, कचरे का अपघटन, मिट्टी और वनस्पति उत्पादन और नवीनीकरण, फसलों और प्राकृतिक वनस्पतियों का परागण, आर्द्रभूमि के माध्यम से भूजल पुनर्भरण, बीज फैलाव, और ग्रीनहाउस गैस शमन बिना कुछ किए मिलती हे । जिनको इंसानी हाथो से कर पाना नामुमकिन हे ।

आगे हम बायोडायवर्सिटी के महत्व के बारे में एक एक करके जानेंगे ।

  • मेरीलैंड यूनिवर्सिटी के मुताबिक प्रजातिओ में विविधता बढ़ने से पारिस्थितिक तंत्र ज्यादा उत्पादकता और कार्याक्षमता के साथ काम करता हे । जिनसे ज्यादा प्राकृतिक संसाधन की मात्रा बढ़ेगी जिससे परिस्तितिक तंत्र में अन्य प्रजाति उनका लाभ उठा पाएंगे ।
  • हर एक प्रजाति पारिस्थितिक तंत्र को कार्यक्षम रखने के लिए अलग अलग भूमिका निभाते हे । अगर प्रजाति में विविधता नहीं रहेगी तो पारिस्थितिक पर्यावरण में समस्याए खड़ी हो सकती हे ।
  • प्रजातिओ में विविधता होने के कारण हमें फल, अनाज, मांस, लकड़ी, फाइबर, किशमिश, रंग, दवा, एंटीबायोटिक्स, आदि प्रकृति से मिलते हे ।
  • प्रजातिओ में विविधता ही किसी भी समुदाय को कुदरती आफत का सामना करने के लिए सखम बनाती हे ।
  • पारिस्थितिक तंत्र एक गाड़ी की तरह हे । जैसे गाड़ी में अलग अलग स्पेयर पार्ट्स होते हे जिससे गाड़ी चलती हे वैसे ही पारिस्थितिक तंत्र में अलग अलग प्रजातीआँ हे । अगर उनमे विविधता कम हो जाएगी तो पारिस्थितिक तंत्र भी वैसे काम करेगा जैसे बिना स्पेयर पार्ट्स के गाड़ी ।
  • इसके आलावा हमें मनोरंजन और पर्यटन, अलग अलग प्रजाति के प्राणिओ की शिक्षा और अनुसंधान जैसे फायदे होते हे। (प्रजातीय विविधता का महत्व)

प्रसंगवश, मेने टाइगर और उसकी प्रजातिओ के बारे में Tiger in hindi के ऊपर विस्तृत में आर्टिकल लिखा हे तो आप उसे जरूर पढ़े ।

  • नई किस्मों और संकरों को विकसित करने के लिए प्रजनकों को विकल्प प्रदान करके फसलों में आनुवंशिक परिवर्तनशीलता की उपस्थिति इसके और सुधार के लिए आवश्यक है ।
  • औषधीय पेड़पौधे पहले के ज़माने से ही इंसान के इलाज करने के लिए उपयोग में लिए जा रहे हे । ऐसे पौधों को बचाने के क्रॉसब्रीडिंग (दो भिन्‍न जाति के नर एवं मादा के लैंगिक संसर्ग के फलस्‍वरूप जीव का उत्‍पन्‍न होना) करके रोग प्रतिरोध, तनाव के प्रति सहनशीलता में वृद्धि जैसे वांछनीय लक्षणों वाले पौधों का उत्पादन किया जा सकता है ।
  • विभिन्न आनुवंशिक रूपों को पार करके पौधों की नई किस्मों को उगाया जा सकता है ।
  • आनुवंशिक विविधता से प्रजातिओ में अवांछनीय (अनिच्छनीय) वंशानुगत लक्षण जो प्रजाति के लिए हानिकारक हे उनको दूर किया जाता हे । इन अनिच्छनीय लक्षण जैसे कई प्राणिओ में छोटा सर , टेढ़ी पूछ या छोटे पाव देखने को मिलते हे इन लक्षणों को क्रॉसब्रीडिंग से दूर किया जाता हे जो आनुवंशिक विविधता के बिना मुमकिन नहीं हे ।
  • आनुवंशिक विविधता व्यक्ति को विभिन्न भौतिक विशेषताओं और तनाव, बीमारियों और प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने की क्षमता को जन्म देती है।
  • पारिस्थितिक विविधता के कारण अलग अलग पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बना रहता हे ।
  • परिस्तितिक तंत्र सभी अलग अलग प्रजातिओ के लिए प्राकृतिक वास और जीवन की प्रक्रियाओं के लिए अनुकूल होता हे ।
  • पारिस्थितिक तंत्र में विभिन्न प्रजातियों की अलग-अलग कार्यात्मक भूमिकाएँ होती हैं जो उस पारिस्थितिकी तंत्र की विशिष्ट विशेषताओं को बनाए रखने में मदद करती हैं। source
  • पारिस्थितिक तंत्र में कार्यात्मक विविधता का काफी महत्व हे । कार्यात्मक विविधता के अध्ययन से पता चलता हे की विविध प्रजातिआ कैसे पारिस्थितिक तंत्र को असर करते हे जिससे पारिस्थितिक तंत्र की समस्याओ के हल ढूंढे जा सकते हे ।

Conclusion of Biodiversity

तो जैव विविधता के इस आर्टिकल में अपने जाना की :

  • पृथ्वी पे पायी जाने वाली अलग अलग जीवनी की विविधता को जैव विविधता कहते हे ।
  • जैव विविधता के चार प्रकार हे । प्रजातीय विविधता, आनुवंशिक विविधता, पारिस्थितिक विविधता और कार्यात्मक विविधता ।
  • हमने चारो विविधता की परिभाषा और उदहारण देखे ।
  • आखिर में हमने जैव विविधता के महत्व के बारे में चर्चा की ।

आज के जैव विविधता के इस आर्टिकल में बस इतना ही । वैसे देखा जाये तो Biodiversity एक बड़ा टॉपिक हे तो इसके बारे में और जानकारी में आगे के आर्टिकल में जरूर शामिल कर दूंगा । आगे के हम इंडिया के बायोडायवर्सिटी के बारे में जानकारी दूंगा ।

तब तक के लिए ऐसे ही पढ़ते रहे । और अपने दोस्तों साथ जानकारी जरूर शेयर करे । और केसा लगा ये आर्टिकल ? कमेंट बॉक्स में जरूर बताए । सुझाव या और जानकारी के लिए मुझे ईमेल([email protected]) करे । धन्यवाद ।

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